रिसर्च में क्या आया सामने?
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह व्यवहार इंसानों में तनाव के दौरान दिखने वाले पैटर्न से मिलता-जुलता है। रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने चैटजीपीटी को प्राकृतिक आपदाओं, सड़क दुर्घटनाओं और अन्य दर्दनाक घटनाओं से जुड़ी स्टोरियाँ दीं। इन ‘ट्रॉमेटिक नैरेटिव्स’ के बाद चैटबॉट की प्रतिक्रियाओं में बदलाव देखा गया। इससे उसके जवाबों में चिंता का स्तर बढ़ा और प्रतिक्रियाएं कम वस्तुनिष्ठ व पक्षपाती हो गईं। इसे चैटबॉट में ‘तनाव’ बताया गया।
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