Latest News
आखिर भारत के लिए अपना देसी AI क्यों जरूरी है? दुनिया के सबसे लोकप्रिय AI प्लेटफॉर्म विदेशी लॉजिक और डेटा पर तैयार हुए हैं और इनका नियंत्रण भी विदेशी जमीन से होता है कल्याण नहीं, अधिकार: भारत को अब एक समान राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन दर अपनानी ही होगी भारत में आज दिव्यांग आबादी 4.5 से 5 करोड़ के बीच है और इसमें से महज 40-45 फीसदी पात्र व्यक्तियों को ही दिव्यांग पेंशन मिलती है ग्रोथ की लहरों पर सवार टैक्स कटौती, जीएसटी में राहत और ब्याज दरें घटने से खपत बढ़ी और ग्रोथ ऊपर चढ़ी. ऐसे में अर्थव्यवस्था को लेकर जन भावना उम्मीदों से भरी. महंगाई दर भी कम है यानी गोल्डीलॉक मोमेंट (ग्रोथ ज्यादा, महंगाई कम) बना हुआ है. लेकिन रोजगार के मोर्चे पर अब भी काले बादल मंडरा रहे. बेहतर भारत के लिए बढ़ती चाह भारतीयों का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार से लड़ाई और इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर तो तरक्की हुई है लेकिन एआइ, नए लेबर कानून और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर राय बंटी हुई भरोसा तो है लेकिन बेचैनी भी कायम ज्यादातर लोगों की राय में यह सही है लेकिन इसे पूर्वाग्रह से ग्रस्त मानने वालों की संख्या भी कम नहीं खुद अपनी राह बनाने का वक्त डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व व्यवस्था को पूरी तरह उलट-पुलट दिया और टैरिफ को हथियार बना डाला. ऐसे हालात में भारत बदली रणनीतिक जरूरतों के साथ तालमेल बनाने को साझेदारियों में विविधता लाते हुए सुधारों को अपना रहा. इस रवैए को मिला अधिकांश भारतीयों का समर्थन.

आखिर भारत के लिए अपना देसी AI क्यों जरूरी है? दुनिया के सबसे लोकप्रिय AI प्लेटफॉर्म विदेशी लॉजिक और डेटा पर तैयार हुए हैं और इनका नियंत्रण भी विदेशी जमीन से होता है

ग्लोबल टेक पावर हाउस होने के नाते भारत में यह सवाल जोरों से उठ रहा है कि क्या हम सचमुच डिजिटल इकोनॉमी और AI मॉडल में आत्मनिर्भर हो सकेंगे. अभी

Read More »

कल्याण नहीं, अधिकार: भारत को अब एक समान राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन दर अपनानी ही होगी भारत में आज दिव्यांग आबादी 4.5 से 5 करोड़ के बीच है और इसमें से महज 40-45 फीसदी पात्र व्यक्तियों को ही दिव्यांग पेंशन मिलती है

ग्रोथ की लहरों पर सवार टैक्स कटौती, जीएसटी में राहत और ब्याज दरें घटने से खपत बढ़ी और ग्रोथ ऊपर चढ़ी. ऐसे में अर्थव्यवस्था को लेकर जन भावना उम्मीदों से भरी. महंगाई दर भी कम है यानी गोल्डीलॉक मोमेंट (ग्रोथ ज्यादा, महंगाई कम) बना हुआ है. लेकिन रोजगार के मोर्चे पर अब भी काले बादल मंडरा रहे.

बेहतर भारत के लिए बढ़ती चाह भारतीयों का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार से लड़ाई और इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर तो तरक्की हुई है लेकिन एआइ, नए लेबर कानून और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर राय बंटी हुई

खुद अपनी राह बनाने का वक्त डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व व्यवस्था को पूरी तरह उलट-पुलट दिया और टैरिफ को हथियार बना डाला. ऐसे हालात में भारत बदली रणनीतिक जरूरतों के साथ तालमेल बनाने को साझेदारियों में विविधता लाते हुए सुधारों को अपना रहा. इस रवैए को मिला अधिकांश भारतीयों का समर्थन.

आज के बांग्लादेश में तारिक रहमान होना इतना अहम क्यों है? तारिक रहमान बांग्लादेश के प्रधानमंत्री कार्यालय में भारी राजनीतिक समर्थन और उतनी ही बड़ी ज़िम्मेदारी के साथ कदम रख रहे हैं. क्या वे संघर्षों से थके हुए इस देश को संयम के साथ चला पाएंगे?

कल्याण नहीं, अधिकार: भारत को अब एक समान राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन दर अपनानी ही होगी भारत में आज दिव्यांग आबादी 4.5 से 5 करोड़ के बीच है और इसमें से महज 40-45 फीसदी पात्र व्यक्तियों को ही दिव्यांग पेंशन मिलती है

Read More »

ग्रोथ की लहरों पर सवार टैक्स कटौती, जीएसटी में राहत और ब्याज दरें घटने से खपत बढ़ी और ग्रोथ ऊपर चढ़ी. ऐसे में अर्थव्यवस्था को लेकर जन भावना उम्मीदों से भरी. महंगाई दर भी कम है यानी गोल्डीलॉक मोमेंट (ग्रोथ ज्यादा, महंगाई कम) बना हुआ है. लेकिन रोजगार के मोर्चे पर अब भी काले बादल मंडरा रहे.

Read More »

बेहतर भारत के लिए बढ़ती चाह भारतीयों का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार से लड़ाई और इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर तो तरक्की हुई है लेकिन एआइ, नए लेबर कानून और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर राय बंटी हुई

Read More »

कल्याण नहीं, अधिकार: भारत को अब एक समान राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन दर अपनानी ही होगी भारत में आज दिव्यांग आबादी 4.5 से 5 करोड़ के बीच है और इसमें से महज 40-45 फीसदी पात्र व्यक्तियों को ही दिव्यांग पेंशन मिलती है

ग्रोथ की लहरों पर सवार टैक्स कटौती, जीएसटी में राहत और ब्याज दरें घटने से खपत बढ़ी और ग्रोथ ऊपर चढ़ी. ऐसे में अर्थव्यवस्था को लेकर जन भावना उम्मीदों से भरी. महंगाई दर भी कम है यानी गोल्डीलॉक मोमेंट (ग्रोथ ज्यादा, महंगाई कम) बना हुआ है. लेकिन रोजगार के मोर्चे पर अब भी काले बादल मंडरा रहे.

बेहतर भारत के लिए बढ़ती चाह भारतीयों का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार से लड़ाई और इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर तो तरक्की हुई है लेकिन एआइ, नए लेबर कानून और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर राय बंटी हुई

खुद अपनी राह बनाने का वक्त डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व व्यवस्था को पूरी तरह उलट-पुलट दिया और टैरिफ को हथियार बना डाला. ऐसे हालात में भारत बदली रणनीतिक जरूरतों के साथ तालमेल बनाने को साझेदारियों में विविधता लाते हुए सुधारों को अपना रहा. इस रवैए को मिला अधिकांश भारतीयों का समर्थन.

कल्याण नहीं, अधिकार: भारत को अब एक समान राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन दर अपनानी ही होगी भारत में आज दिव्यांग आबादी 4.5 से 5 करोड़ के बीच है और इसमें से महज 40-45 फीसदी पात्र व्यक्तियों को ही दिव्यांग पेंशन मिलती है

ग्रोथ की लहरों पर सवार टैक्स कटौती, जीएसटी में राहत और ब्याज दरें घटने से खपत बढ़ी और ग्रोथ ऊपर चढ़ी. ऐसे में अर्थव्यवस्था को लेकर जन भावना उम्मीदों से भरी. महंगाई दर भी कम है यानी गोल्डीलॉक मोमेंट (ग्रोथ ज्यादा, महंगाई कम) बना हुआ है. लेकिन रोजगार के मोर्चे पर अब भी काले बादल मंडरा रहे.

बेहतर भारत के लिए बढ़ती चाह भारतीयों का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार से लड़ाई और इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर तो तरक्की हुई है लेकिन एआइ, नए लेबर कानून और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर राय बंटी हुई

Share Market

कल्याण नहीं, अधिकार: भारत को अब एक समान राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन दर अपनानी ही होगी भारत में आज दिव्यांग आबादी 4.5 से 5 करोड़ के बीच है और इसमें से महज 40-45 फीसदी पात्र व्यक्तियों को ही दिव्यांग पेंशन मिलती है

ग्रोथ की लहरों पर सवार टैक्स कटौती, जीएसटी में राहत और ब्याज दरें घटने से खपत बढ़ी और ग्रोथ ऊपर चढ़ी. ऐसे में अर्थव्यवस्था को लेकर जन भावना उम्मीदों से भरी. महंगाई दर भी कम है यानी गोल्डीलॉक मोमेंट (ग्रोथ ज्यादा, महंगाई कम) बना हुआ है. लेकिन रोजगार के मोर्चे पर अब भी काले बादल मंडरा रहे.

बेहतर भारत के लिए बढ़ती चाह भारतीयों का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार से लड़ाई और इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर तो तरक्की हुई है लेकिन एआइ, नए लेबर कानून और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर राय बंटी हुई

खुद अपनी राह बनाने का वक्त डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व व्यवस्था को पूरी तरह उलट-पुलट दिया और टैरिफ को हथियार बना डाला. ऐसे हालात में भारत बदली रणनीतिक जरूरतों के साथ तालमेल बनाने को साझेदारियों में विविधता लाते हुए सुधारों को अपना रहा. इस रवैए को मिला अधिकांश भारतीयों का समर्थन.

आज के बांग्लादेश में तारिक रहमान होना इतना अहम क्यों है? तारिक रहमान बांग्लादेश के प्रधानमंत्री कार्यालय में भारी राजनीतिक समर्थन और उतनी ही बड़ी ज़िम्मेदारी के साथ कदम रख रहे हैं. क्या वे संघर्षों से थके हुए इस देश को संयम के साथ चला पाएंगे?

कल्याण नहीं, अधिकार: भारत को अब एक समान राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन दर अपनानी ही होगी भारत में आज दिव्यांग आबादी 4.5 से 5 करोड़ के बीच है और इसमें से महज 40-45 फीसदी पात्र व्यक्तियों को ही दिव्यांग पेंशन मिलती है

ग्रोथ की लहरों पर सवार टैक्स कटौती, जीएसटी में राहत और ब्याज दरें घटने से खपत बढ़ी और ग्रोथ ऊपर चढ़ी. ऐसे में अर्थव्यवस्था को लेकर जन भावना उम्मीदों से भरी. महंगाई दर भी कम है यानी गोल्डीलॉक मोमेंट (ग्रोथ ज्यादा, महंगाई कम) बना हुआ है. लेकिन रोजगार के मोर्चे पर अब भी काले बादल मंडरा रहे.

बेहतर भारत के लिए बढ़ती चाह भारतीयों का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार से लड़ाई और इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर तो तरक्की हुई है लेकिन एआइ, नए लेबर कानून और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर राय बंटी हुई

खुद अपनी राह बनाने का वक्त डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व व्यवस्था को पूरी तरह उलट-पुलट दिया और टैरिफ को हथियार बना डाला. ऐसे हालात में भारत बदली रणनीतिक जरूरतों के साथ तालमेल बनाने को साझेदारियों में विविधता लाते हुए सुधारों को अपना रहा. इस रवैए को मिला अधिकांश भारतीयों का समर्थन.

आज के बांग्लादेश में तारिक रहमान होना इतना अहम क्यों है? तारिक रहमान बांग्लादेश के प्रधानमंत्री कार्यालय में भारी राजनीतिक समर्थन और उतनी ही बड़ी ज़िम्मेदारी के साथ कदम रख रहे हैं. क्या वे संघर्षों से थके हुए इस देश को संयम के साथ चला पाएंगे?

Live cricket

आपकी राय

Are You Satisfied Ucf India News © Kama

कल्याण नहीं, अधिकार: भारत को अब एक समान राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन दर अपनानी ही होगी भारत में आज दिव्यांग आबादी 4.5 से 5 करोड़ के बीच है और इसमें से महज 40-45 फीसदी पात्र व्यक्तियों को ही दिव्यांग पेंशन मिलती है

ग्रोथ की लहरों पर सवार टैक्स कटौती, जीएसटी में राहत और ब्याज दरें घटने से खपत बढ़ी और ग्रोथ ऊपर चढ़ी. ऐसे में अर्थव्यवस्था को लेकर जन भावना उम्मीदों से भरी. महंगाई दर भी कम है यानी गोल्डीलॉक मोमेंट (ग्रोथ ज्यादा, महंगाई कम) बना हुआ है. लेकिन रोजगार के मोर्चे पर अब भी काले बादल मंडरा रहे.

बेहतर भारत के लिए बढ़ती चाह भारतीयों का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार से लड़ाई और इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर तो तरक्की हुई है लेकिन एआइ, नए लेबर कानून और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर राय बंटी हुई

कल्याण नहीं, अधिकार: भारत को अब एक समान राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन दर अपनानी ही होगी भारत में आज दिव्यांग आबादी 4.5 से 5 करोड़ के बीच है और इसमें से महज 40-45 फीसदी पात्र व्यक्तियों को ही दिव्यांग पेंशन मिलती है

ग्रोथ की लहरों पर सवार टैक्स कटौती, जीएसटी में राहत और ब्याज दरें घटने से खपत बढ़ी और ग्रोथ ऊपर चढ़ी. ऐसे में अर्थव्यवस्था को लेकर जन भावना उम्मीदों से भरी. महंगाई दर भी कम है यानी गोल्डीलॉक मोमेंट (ग्रोथ ज्यादा, महंगाई कम) बना हुआ है. लेकिन रोजगार के मोर्चे पर अब भी काले बादल मंडरा रहे.

बेहतर भारत के लिए बढ़ती चाह भारतीयों का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार से लड़ाई और इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर तो तरक्की हुई है लेकिन एआइ, नए लेबर कानून और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर राय बंटी हुई

बड़ी खबरें

कल्याण नहीं, अधिकार: भारत को अब एक समान राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन दर अपनानी ही होगी भारत में आज दिव्यांग आबादी 4.5 से 5 करोड़ के बीच है और इसमें से महज 40-45 फीसदी पात्र व्यक्तियों को ही दिव्यांग पेंशन मिलती है

ग्रोथ की लहरों पर सवार टैक्स कटौती, जीएसटी में राहत और ब्याज दरें घटने से खपत बढ़ी और ग्रोथ ऊपर चढ़ी. ऐसे में अर्थव्यवस्था को लेकर जन भावना उम्मीदों से भरी. महंगाई दर भी कम है यानी गोल्डीलॉक मोमेंट (ग्रोथ ज्यादा, महंगाई कम) बना हुआ है. लेकिन रोजगार के मोर्चे पर अब भी काले बादल मंडरा रहे.

बेहतर भारत के लिए बढ़ती चाह भारतीयों का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार से लड़ाई और इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर तो तरक्की हुई है लेकिन एआइ, नए लेबर कानून और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर राय बंटी हुई

कल्याण नहीं, अधिकार: भारत को अब एक समान राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन दर अपनानी ही होगी भारत में आज दिव्यांग आबादी 4.5 से 5 करोड़ के बीच है और इसमें से महज 40-45 फीसदी पात्र व्यक्तियों को ही दिव्यांग पेंशन मिलती है

ग्रोथ की लहरों पर सवार टैक्स कटौती, जीएसटी में राहत और ब्याज दरें घटने से खपत बढ़ी और ग्रोथ ऊपर चढ़ी. ऐसे में अर्थव्यवस्था को लेकर जन भावना उम्मीदों से भरी. महंगाई दर भी कम है यानी गोल्डीलॉक मोमेंट (ग्रोथ ज्यादा, महंगाई कम) बना हुआ है. लेकिन रोजगार के मोर्चे पर अब भी काले बादल मंडरा रहे.

बेहतर भारत के लिए बढ़ती चाह भारतीयों का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार से लड़ाई और इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर तो तरक्की हुई है लेकिन एआइ, नए लेबर कानून और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर राय बंटी हुई

कल्याण नहीं, अधिकार: भारत को अब एक समान राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन दर अपनानी ही होगी भारत में आज दिव्यांग आबादी 4.5 से 5 करोड़ के बीच है और इसमें से महज 40-45 फीसदी पात्र व्यक्तियों को ही दिव्यांग पेंशन मिलती है

ग्रोथ की लहरों पर सवार टैक्स कटौती, जीएसटी में राहत और ब्याज दरें घटने से खपत बढ़ी और ग्रोथ ऊपर चढ़ी. ऐसे में अर्थव्यवस्था को लेकर जन भावना उम्मीदों से भरी. महंगाई दर भी कम है यानी गोल्डीलॉक मोमेंट (ग्रोथ ज्यादा, महंगाई कम) बना हुआ है. लेकिन रोजगार के मोर्चे पर अब भी काले बादल मंडरा रहे.

बेहतर भारत के लिए बढ़ती चाह भारतीयों का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार से लड़ाई और इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर तो तरक्की हुई है लेकिन एआइ, नए लेबर कानून और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर राय बंटी हुई

कल्याण नहीं, अधिकार: भारत को अब एक समान राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन दर अपनानी ही होगी भारत में आज दिव्यांग आबादी 4.5 से 5 करोड़ के बीच है और इसमें से महज 40-45 फीसदी पात्र व्यक्तियों को ही दिव्यांग पेंशन मिलती है

ग्रोथ की लहरों पर सवार टैक्स कटौती, जीएसटी में राहत और ब्याज दरें घटने से खपत बढ़ी और ग्रोथ ऊपर चढ़ी. ऐसे में अर्थव्यवस्था को लेकर जन भावना उम्मीदों से भरी. महंगाई दर भी कम है यानी गोल्डीलॉक मोमेंट (ग्रोथ ज्यादा, महंगाई कम) बना हुआ है. लेकिन रोजगार के मोर्चे पर अब भी काले बादल मंडरा रहे.

बेहतर भारत के लिए बढ़ती चाह भारतीयों का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार से लड़ाई और इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर तो तरक्की हुई है लेकिन एआइ, नए लेबर कानून और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर राय बंटी हुई

कल्याण नहीं, अधिकार: भारत को अब एक समान राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन दर अपनानी ही होगी भारत में आज दिव्यांग आबादी 4.5 से 5 करोड़ के बीच है और इसमें से महज 40-45 फीसदी पात्र व्यक्तियों को ही दिव्यांग पेंशन मिलती है

ग्रोथ की लहरों पर सवार टैक्स कटौती, जीएसटी में राहत और ब्याज दरें घटने से खपत बढ़ी और ग्रोथ ऊपर चढ़ी. ऐसे में अर्थव्यवस्था को लेकर जन भावना उम्मीदों से भरी. महंगाई दर भी कम है यानी गोल्डीलॉक मोमेंट (ग्रोथ ज्यादा, महंगाई कम) बना हुआ है. लेकिन रोजगार के मोर्चे पर अब भी काले बादल मंडरा रहे.

बेहतर भारत के लिए बढ़ती चाह भारतीयों का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार से लड़ाई और इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर तो तरक्की हुई है लेकिन एआइ, नए लेबर कानून और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर राय बंटी हुई