18 जनवरी को प्रशासन ने ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से गाड़ी से उतरकर स्नान करने को कहा. इस आदेश के बाद पुलिस और शंकराचार्य के बीच टकराव हो गया, जो धरने तक पहुंच गया. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला प्रशासन और राज्य सरकार पर कड़ा हमला किया और कहा कि शंकराचार्य का फैसला केवल शंकराचार्य ही करता है.
प्रयागराज माघ मेले के दौरान ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों और मेला प्रशासन के बीच टकराव हुआ है, जो राजनीतिक विवाद में बदल गया है. शंकराचार्य पदवी का इतिहास आठवीं सदी के आदि शंकराचार्य से जुड़ा है, जिन्होंने चार प्रमुख मठों की स्थापना की थी.

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