हेमंत सोरेन सरकार मंईयां सम्मान की लाभार्थी महिलाओं को अब बिना किसी गारंटी के लोन देने जा रही है और इस घोषणा से BJP बेचैन है
बीते विधानसभा चुनाव से ठीक तीन महीने पहले यानी अगस्त 2024 में हेमंत सोरेन ने ‘मंईयां सम्मान योजना’ की घोषणा की. शुरुआत में 18 वर्ष से अधिक और 50 साल तक की महिलाओं को 1,000 रुपए दिए गए. जवाब में BJP ने 2,100 रुपए देने की बात की. नहले पर दहला मारते हुए हेमंत सरकार ने चुनाव की घोषणा से ठीक एक दिन पहले इसे कैबिनेट से पास कराकर 2,500 रुपए कर दिया. झारखंड में ऐसा कुछ पहली बार हो रहा था. पैसों की इस बारिश ने अपना असर दिखाया और 81 सीटों वाली झारखंड विधानसभा में हेमंत सरकार 54 सीटों के साथ सत्ता में आ गई.
ऐसा ही कुछ अब नगर निकाय चुनाव में होने की संभावना दिखने लगी है. चुनाव के बीच हेमंत सरकार ने एक बार फिर वैसी ही घोषणा कर दी है. इसे ‘मंईयां सम्मान 2.0’ कहा जा रहा है. दरअसल, बीते 8 फरवरी को हुई इस नई घोषणा के मुताबिक, मंईयां सम्मान की लाभार्थी महिलाओं को अब 20 हजार रुपए तक का लोन बैंक बिना किसी गारंटी के देने जा रहे हैं. यह उन्हें छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए दिया जाएगा. कर्ज की किस्तों को महिलाओं को पहले से मिल रही 2,500 रुपए प्रतिमाह की राशि से ही काट लिया जाएगा.
अगर एक ही परिवार में मंईयां सम्मान योजना की एक से ज्यादा लाभार्थी महिलाएं हैं, तो सभी को अलग-अलग 20 हजार का लोन मिलेगा. यानी योजना का लाभ हर पात्र महिला उठा सकेगी, चाहे वह एक ही घर में हो या अलग-अलग. इस योजना को लेकर राज्य सरकार के वित्त विभाग और बैंकर्स समिति के बीच सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है. बीते 7 फरवरी को हुई बैठक में बैंकों ने इस पहल में सहयोग देने पर सहमति जताई है. सरकार का मानना है कि महिलाओं को छोटे व्यवसाय के लिए पूंजी मिलने से राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
बेचैन हुई BJP
चुनाव के बीच ऐसी घोषणा ने एक बार फिर BJP को बेचैन कर दिया है. पार्टी ने इसे आचार संहिता का उल्लंघन माना है और इसकी शिकायत चुनाव आयोग से की है. BJP के विधि विभाग के प्रदेश संयोजक सुधीर श्रीवास्तव ने कहा, “अभी 23 तारीख को पूरे प्रदेश में चुनाव होना है. तब तक आदर्श आचार संहिता लागू है. लेकिन सरकार को दिखाना है कि हम राज्य निर्वाचन आयोग को नहीं मानते. चुनाव आयोग से हमने इसकी जांच कराने की मांग की है. आयोग ने भी इसे गंभीर मामला माना है.”
हालांकि, सरकार किसी भी जांच से बच निकलेगी, क्योंकि इस फैसले की लिखित या मौखिक जानकारी आधिकारिक तौर पर मीडिया को नहीं दी गई. दरअसल, बीते 7 फरवरी को वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बैंक समिति के साथ बैठक की थी, जिसमें उन्होंने बैंकों को ऐसा करने का निर्देश दिया. ऐसे में यह सीधे तौर पर आचार संहिता के उल्लंघन का मामला नहीं दिख रहा है.









