Home » सामाजिक मुद्दे » खुद अपनी राह बनाने का वक्त डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व व्यवस्था को पूरी तरह उलट-पुलट दिया और टैरिफ को हथियार बना डाला. ऐसे हालात में भारत बदली रणनीतिक जरूरतों के साथ तालमेल बनाने को साझेदारियों में विविधता लाते हुए सुधारों को अपना रहा. इस रवैए को मिला अधिकांश भारतीयों का समर्थन.

खुद अपनी राह बनाने का वक्त डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व व्यवस्था को पूरी तरह उलट-पुलट दिया और टैरिफ को हथियार बना डाला. ऐसे हालात में भारत बदली रणनीतिक जरूरतों के साथ तालमेल बनाने को साझेदारियों में विविधता लाते हुए सुधारों को अपना रहा. इस रवैए को मिला अधिकांश भारतीयों का समर्थन.

Facebook
Twitter
WhatsApp
Telegram

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जनवरी की शुरुआत में एक आयोजन में कहा था कि अपने पड़ोस में भारत का प्रभाव जोर-जबरदस्ती पर नहीं बल्कि भरोसे, सहयोग और साझा खुशहाली पर टिका है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत पड़ोसी देशों के अच्छे कामों का समर्थन करता है और बुरे कामों के लिए ‘रेड लाइन’ तय करता है. भारत की पास-पड़ोस की नीति को देखने-समझने के लिए यह अच्छा चश्मा है.

नई दिल्ली ने बांग्लादेश में शेख हसीना की रुखसती के बाद आए नाजुक बदलावों को संयम और बातचीत के जरिए संभाला और श्रीलंका, नेपाल और मालदीव के साथ रिश्तों को आर्थिक उपायों से मजबूत किया. अलबत्ता पाकिस्तान के साथ रिश्ते बर्फीले बने रहे. दरअसल सुरक्षा का मसला सबसे ऊपर था जबकि इस्लामाबाद के ‘सदाबहार दोस्त’ चीन के साथ रिश्ते सुधारने का काम अभी भी चल रहा है.

इस तरह भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति ने परिणामपरक सहयोग को प्राथमिकता दी, जिसे जनवरी के इंडिया टुडे देश का मिज़ाज सर्वे की भी मंजूरी मिल गई है—51 फीसद लोग मानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में पड़ोसियों के साथ भारत के रिश्तों में सुधार आया है जबकि 34 फीसद ने कहा कि रिश्ते बिगड़े हैं.

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments

UCF India News हिंदी के साथ रहें अपडेट

सब्स्क्राइब कीजिए हमारा डेली न्यूजलेटर और पाइए खबरें आपके इनबॉक्स में

और खबरें

जंग के माहौल में भारत ने 50 हजार लोगों को इजरायल भेजने पर सहमति क्यों जताई? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इजरायल यात्रा का जो ज्वाइंट स्टेमेंट जारी हुआ है, उसके मुताबिक भारत अगले पांच सालों में 50,000 कामगार इजरायल भेजेगा

  “मैं यहां रोज़ी-रोटी कमाने आया था, लेकिन खतरनाक बमों और मिसाइलों के हमलों के बीच जान बचाना मुश्किल हो

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए दो दिग्गजों की लड़ाई में क्या तीसरा बाजी मारेगा? छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव सबसे बड़े दावेदार हैं लेकिन इनके बीच एक तीसरा चेहरा भी है

  छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज का कार्यकाल इसी साल जुलाई में खत्म होने जा रहा है. उन्हें

आपकी जेब पर कैसे चोट लगा सकती है ईरान की जंग? अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमले ने वैश्विक तेल बाजार में खलबली मचा दी है. भारत के लिए यह न केवल महंगाई का खतरा है, बल्कि खाड़ी देशों से आने वाले रेमिटेंस और व्यापार के लिए भी बड़ी चुनौती है

  अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग से भारत की बेचैनी बढ़ गई है. भारत का नफा-नुकसान इस

लंबी रेस का पक्का फॉर्मूला सुधार की महत्वाकांक्षा और राजकोषीय विकल्पों से लेकर मैन्युफैक्चरिंग, नौकरियों और निवेशकों के विश्वास तक बोर्ड ऑफ इंडिया टुडे इकोनॉमिस्ट्स (बाइट) ने 1 फरवरी को पेश केंद्रीय बजट के वादों का व्यापक विश्लेषण किया है.

  प्र. आपकी राय में बजट में फोकस वाले तीन सबसे बड़े क्षेत्र कौन से हैं? ● नीलकंठ मिश्र: पहला और सबसे

0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x