Home » सामाजिक मुद्दे » ग्रोथ की लहरों पर सवार टैक्स कटौती, जीएसटी में राहत और ब्याज दरें घटने से खपत बढ़ी और ग्रोथ ऊपर चढ़ी. ऐसे में अर्थव्यवस्था को लेकर जन भावना उम्मीदों से भरी. महंगाई दर भी कम है यानी गोल्डीलॉक मोमेंट (ग्रोथ ज्यादा, महंगाई कम) बना हुआ है. लेकिन रोजगार के मोर्चे पर अब भी काले बादल मंडरा रहे.

ग्रोथ की लहरों पर सवार टैक्स कटौती, जीएसटी में राहत और ब्याज दरें घटने से खपत बढ़ी और ग्रोथ ऊपर चढ़ी. ऐसे में अर्थव्यवस्था को लेकर जन भावना उम्मीदों से भरी. महंगाई दर भी कम है यानी गोल्डीलॉक मोमेंट (ग्रोथ ज्यादा, महंगाई कम) बना हुआ है. लेकिन रोजगार के मोर्चे पर अब भी काले बादल मंडरा रहे.

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नए साल के आगाज के साथ ही भारत वृद्धि या ग्रोथ की राह पर मजबूती से आगे बढ़ता लग रहा है. 2025 में कई वजहों—महंगाई में नरमी, माल और सेवा कर (जीएसटी) में कमी और प्रत्यक्ष करों में कटौती—ने खपत को बढ़ावा दिया है. लिहाजा, मौजूदा वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में 8.2 फीसद की ग्रोथ दर्ज की गई. यह न केवल पहली तिमाही में दर्ज 7.2 फीसद की वृद्धि दर से ज्यादा है, बल्कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) समेत कई एजेंसियों की उम्मीदों से भी ज्यादा है.

हालांकि, यह सवाल बना हुआ है कि क्या ये आंकड़े वाकई अर्थव्यवस्था की पूरी असलियत बताते हैं, फिर भी उम्मीद की वजह है. केंद्र सरकार अब वित्त वर्ष 26 के लिए 7.4 फीसद की ग्रोथ का अनुमान लगा रही है, जिससे संकेत मिलता है कि दूसरी तिमाही में बनी विकास की रफ्तार—अगर कोई अनहोनी न हो तो—आगे भी बनी रहेगी. चौंकाने वाली घटनाएं, खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शासन में अमेरिकी नीति में बदलाव, मजबूत ग्रोथ और कम महंगाई के इस ‘गोल्डीलॉक मूमेंट’ का जायका बिगाड़ सकती हैं.

इंडिया टुडे का नवीनतम देश का मिज़ाज सर्वेक्षण इस आशावाद को दिखाता है. मोदी सरकार के अर्थव्यवस्था को संभालने के बारे में पूछे जाने पर 48.8 फीसद उत्तरदाताओं ने इसे ‘अच्छा’ या ‘शानदार’ बताया, जो अगस्त 2025 से थोड़ा ज्यादा है. इसे ‘खराब’ या ‘बहुत खराब’ बताने वालों की संख्या 30.2 फीसद से घटकर 28.6 फीसद रह गई. यह बदलाव आगामी छह महीनों की उम्मीदों में भी दिखता है, जिसमें 35.8 फीसद लोग आर्थिक सुधार की आस देख रहे हैं, जो पहले के 33.1 फीसद से ज्यादा है.

वृद्धि पर अपनी कमान
ताजा देश का मिज़ाज सर्वे में 53.5 फीसद लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिवंगत पीएम मनमोहन सिंह की तुलना में अर्थव्यवस्था को बेहतर तरीके से संभाला है, यह आंकड़ा अगस्त 2025 के 44.6 फीसद से ज्यादा है. लगभग 35 फीसद लोगों ने 2014 से अपनी व्यक्तिगत आर्थिक स्थिति में सुधार की बात कही है, जो पहले के 33.1 फीसद से थोड़ा ज्यादा है. फिर भी, 31.6 फीसद लोग—हालांकि यह अगस्त 2025 के 33.7 फीसद से कम है—कहते हैं कि उनकी आर्थिक स्थिति खराब हुई है, जिससे ग्रोथ को और ज्यादा समावेशी बनाने की जरूरत जाहिर होती है.

2025 में दो प्रमुख कदम उठाए गए जिनका मकसद लोगों के हाथों में ज्यादा पैसा पहुंचाना था. प्रत्यक्ष कर के स्लैब में बदलाव का मतलब था कि 12 लाख रुपए तक कमाने वालों (वेतनभोगी करदाताओं के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद 12.75 लाख रुपए) को कोई आयकर नहीं देना पड़ा, जिससे करीब 3.2 करोड़ करदाताओं को फायदा हुआ. सितंबर के आखिर में जीएसटी में बदलाव से 90 फीसद जरूरी सामान पर टैक्स घट गया. इन कदमों को रिजर्व बैंक के कदमों से भी मजबूती मिली, जिसने 2025 में ब्याज दरों में 125 आधार अंक की कटौती की—जो 2019 के बाद से सबसे बड़ी मौद्रिक नरमी थी.

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