चंबल के बीहड़ों का नाम आते ही कभी डकैतों की बंदूकें और बीहड़ की पगडंडियां याद आती थीं. वक्त बदला, डाकुओं का दौर लगभग खत्म हुआ, लेकिन बीहड़ की जमीन अब एक नए किस्म के संगठित अपराध की आहट सुन रही है. कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का गिरोह जिस तरह से आगरा के बाहरी क्षेत्र और उससे सटे गांवों में अपनी पैठ बनाता दिख रहा है, उसने पुलिस और स्थानीय समाज दोनों की चिंता बढ़ा दी है.
हालिया खुलासों ने संकेत दिया है कि यह नेटवर्क केवल रंगदारी तक सीमित नहीं, बल्कि फिल्म उद्योग जैसे हाई-प्रोफाइल सेक्टर में भी दहशत फैलाने की रणनीति पर काम कर रहा है.
रोहित शेट्टी के घर फायरिंग और बीहड़ कनेक्शन
31 दिसंबर की देर रात मुंबई के जुहू इलाके में फिल्म निर्माता-निर्देशक रोहित शेट्टी के घर पर पांच राउंड फायरिंग हुई. घटना की जिम्मेदारी लॉरेंस गैंग से जुड़े शुभम सोनकर ने ली और मकसद साफ बताया गया- रंगदारी. शुरुआती जांच में पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी, लेकिन असली तस्वीर तब सामने आई जब मुंबई क्राइम ब्रांच ने यूपी और हरियाणा एसटीएफ के साथ मिलकर सात और शूटरों को दबोचा. इनमें से पांच युवक आगरा के बाह तहसील के गांव बिजौली के रहने वाले निकले.
मुख्य शूटर दीपक समेत सनी, सोनू, रितिक और विष्णु कुशवाहा की उम्र 22 से 26 साल के बीच है. गिरफ्तारी झज्जर, आगरा और गाजियाबाद-नोएडा बॉर्डर से हुई. पूछताछ में खुलासा हुआ कि दीपक ने सेमी ऑटोमेटिक पिस्टल से फायरिंग की थी और घटना के बाद वह नोएडा में अपने परिचित के यहां छिपा था. एसटीएफ अधिकारियों के मुताबिक, दीपक और विष्णु का सीधा संपर्क विदेश में बैठे गैंग के संचालकों से था.
सोशल मीडिया के जरिए संपर्क बना, फिर एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के जरिए निर्देश दिए गए. दीपक को शुरुआती तौर पर 50 हजार रुपये और हथियार उपलब्ध कराए गए थे, बाकी रकम बाद में देने का वादा था. यह पूरा ऑपरेशन दिखाता है कि गिरोह स्थानीय युवाओं का इस्तेमाल कर राष्ट्रीय स्तर पर दहशत फैलाने की रणनीति अपना रहा है.
मॉडस ऑपरेंडी : सोशल मीडिया से शूटर तक
जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरोह की नई कार्यप्रणाली बेहद संगठित है. सोशल मीडिया अकाउंटों पर गैंग के समर्थन में टिप्पणी करने वाले या अपराधी छवि से प्रभावित युवाओं को चिह्नित किया जाता है. इसके बाद उन्हें निजी तौर पर संपर्क कर “बड़ा नाम” और “तेज कमाई” का लालच दिया जाता है. विष्णु कुशवाहा पर आरोप है कि वह इलाके के बेरोजगार युवाओं को यही सपना दिखाकर जोड़ रहा था. उन्हें बताया जाता था कि बस गोली चलानी है, पहचान नहीं होगी, पैसा मिलेगा और आगे और काम मिलेंगे.
रोहित शेट्टी के घर फायरिंग से पहले भी आरोपियों ने रेकी की थी. घटना के बाद पुलिस की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया गया. एसटीएफ ने ऐसे सौ से अधिक सोशल मीडिया खातों की जांच की है और उत्तर प्रदेश के 26 युवकों को चिह्नित किया है जो गिरोह के संपर्क में पाए गए. यह संकेत है कि नेटवर्क सिर्फ एक-दो वारदात तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठित विस्तार की कोशिश में है.
बाह और बिजौली की बदलती पहचान
बाह क्षेत्र की पहचान कभी स्वतंत्रता सेनानियों और फौजियों की धरती के रूप में रही है. चंबल के बीहड़ों से सटा यह इलाका डकैतों की कहानियों के लिए भी जाना जाता था. बाद में साइबर ठगी करने वाले गिरोह सक्रिय हुए और इसे मिनी जामताड़ा तक कहा जाने लगा. अब बिजौली गांव का नाम शूटरों की गिरफ्तारी से जुड़ रहा है. चंबल के बीहड़ों में अपराध का रूप बदल गया है. अब यह सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड ऐप और अंतरराज्यीय नेटवर्क के जरिए संचालित हो रहा है. गांव में बैठा एक युवक विदेश में बैठे संचालक से सीधे निर्देश ले सकता है. आगरा के समाजसेवी नवीन जैन बताते हैं कि यह बदलाव ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि इसमें अपराध ग्लैमर के साथ परोसा जा रहा है. युवा अपराधी को नायक की तरह देखने लगते हैं.
सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ तस्वीरें, गैंग के नाम पर पोस्ट और कमेंट, यह सब उन्हें धीरे-धीरे मानसिक रूप से तैयार करता है. करीब 20 हजार की आबादी वाले बिजौली से तीन वर्षों में आठ शूटरों की गिरफ्तारी हो चुकी है. गांव की गलियों में सन्नाटा है. जिन युवकों को पकड़ा गया, उनके घर पास-पास हैं. आर्थिक स्थिति सामान्य से कमजोर है. कोई होटल में वेटर था, कोई सब्जी-फल बेचता था, कोई जिम में ट्रेनिंग देता था. अस्थिर रोजगार और कम आय ने उन्हें महानगरों की ओर धकेला, जहां चमक-दमक और तेज कमाई के लालच ने उन्हें अपराध की ओर मोड़ दिया.








