Home » National News » ढुलाई का खर्चा कैसे होगा कम; नितिन गडकरी ने बताया प्लान इंडिया टुडे इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी बताया कि उनका मंत्रालय ढुलाई की लागत घटाने के लिए कई मोर्चों पर काम कर रहा है

ढुलाई का खर्चा कैसे होगा कम; नितिन गडकरी ने बताया प्लान इंडिया टुडे इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी बताया कि उनका मंत्रालय ढुलाई की लागत घटाने के लिए कई मोर्चों पर काम कर रहा है

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25 फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित इंडिया टुडे इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव में शिरकत करने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी पहुंचे थे. इस कार्यक्रम में उन्होंने देश के रोड इंफ्रा, ग्रीन फ्यूल और नेशनल हाईवे के विस्तार पर खुलकर अपनी बात रखी.

‘नेशनल कनेक्टिविटी: मेकिंग भारतमाला 3.0 ए रियलिटी (National connectivity: Making Bharatmala 3.0 a reality )’ विषय पर गडकरी ने कहा कि किसी देश के आर्थिक विकास में सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर बेहद अहम भूमिका निभाता है. इसे अब इसे पर्यावरण के अनुकूल और बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ाना चाहिए.

गडकरी के भाषण का बड़ा हिस्सा लॉजिस्टिक्स लागत (ढुलाई और परिवहन की कुल खर्च) पर केंद्रित था, जिसे उन्होंने भारत की निर्यात के लिए महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि पहले भारत में लॉजिस्टिक्स लागत 14-16 फीसद के बीच थी, जबकि चीन में यह सिर्फ 8 फीसद है. जबकि यूरोप-अमेरिका में इसपर खर्च 12 फीसद के आसपास है. उन्होंने कहा, “मंत्री के तौर पर मेरा लक्ष्य है कि लॉजिस्टिक्स लागत को सिंगल डिजिट यानी 9 फीसद या उससे कम तक लाया जाए.”

उन्होंने IIM बैंगलोर और कानपुर व चेन्नई IIT के रिसर्च का हवाला देते हुए दावा किया कि सड़कों की गुणवत्ता में सुधार से लॉजिस्टिक्स लागत लगभग 10 फीसद तक कम हो गई है. उनका मुख्य संदेश यह था कि हाईवे का विस्तार सिर्फ कनेक्टिविटी के लिए नहीं है, बल्कि सभी क्षेत्रों में इनपुट लागत (कच्चे माल आदि की लागत) को कम करने के लिए भी है.

गडकरी ने सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार को अल्टरनेटिव फ्यूल और बायोफ्यूल की ओर बढ़ावा देने से जोड़ा. मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेस-वे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक बड़ी बदलाव की हिस्सा है, जिसमें बेहतर सड़कें और साफ ऊर्जा दोनों शामिल हैं. उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ अच्छी सड़कें ही नहीं बना रही, बल्कि अल्टरनेटिव फ्यूल और बायोफ्यूल पर भी काम कर रही है. उन्होंने दावा किया कि नई तकनीकों से ईंधन की लागत बहुत तेजी से कम हो सकती है.

उन्होंने कहा, “हम हाइड्रोजन पर एक पायलट प्रोजेक्ट चला रहे हैं. हमने 10 राष्ट्रीय राजमार्गों को चुना है. इसमें Reliance, Tata, Ashok Leyland, Volvo, HPCL और IPCL जैसी कंपनियां स्टेकहोल्डर हैं. इन राजमार्गों के लिए हमने पहले ही हाइड्रोजन ट्रकों और बसों के पायलट प्रोजेक्ट के लिए 600 करोड़ रुपये मंजूर कर दिए हैं. हाइड्रोजन भविष्य का ईंधन है. मेरा सपना है कि हाइड्रोजन की कीमत को 1 डॉलर प्रति किलोग्राम तक ला दूं.”

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