अगर, कोई इससे वाकिफ न हो तो उसे खोडलधाम ट्रस्ट के अध्यक्ष का पद स्थानीय स्तर पर परोपकार में जुटी किसी संस्था का प्रमुख होने सरीखा लग सकता है. मगर गुजरात के सियासी तबके में उस वक्त हलचल मच गई जब पूर्व मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल की 55 वर्षीया बेटी अनार पटेल को हाल ही में यह पद मिला. इसे गुजरात की सत्ता के शीर्ष गलियारे में उनके प्रवेश के ऐलान के तौर पर देखा गया.
लेउवा पाटीदार देवी खोडल माता की पूजा करते हैं और उनके नाम पर स्थापित यह सामाजिक-धार्मिक संस्था बेहद प्रभावशाली है. यह 50 लाख की आबादी वाले इस समुदाय की प्रतिनिधि के रूप में नजर आती है. उद्यमी नरेश पटेल इसके प्रमुख हैं और वे इसके चेयरमैन बने रहेंगे. गुजरात के 34 में से 32 जिलों में इसकी संगठनात्मक उपस्थिति है.
साल 2017 से इसके शीर्ष पर काबिज नरेश को भाजपा, कांग्रेस और हाल के वर्षों में आम आदमी पार्टी, तीनों ने अपने पाले में लाने की कोशिश की है. मगर उन्होंने कभी किसी भी पार्टी की औपचारिक सदस्यता नहीं ली और न ही कभी चुनाव लड़ा. भाजपा में पाटीदार समुदाय के एक नेता कहते हैं, ”नरेशभाई का मुख्य लक्ष्य समुदाय का कल्याण है. उनका मानना है कि किसी एक पार्टी के साथ खुला गठजोड़ करने से समुदाय की सियासी हिस्सेदारी को नुक्सान पहुंच सकता है.” मगर, 2014 में भाजपा की सदस्यता लेने वाली अनार को संस्था के शीर्ष पर जगह दिए जाने से संकेत मिलता है कि नरेश का झुकाव भाजपा की ओर हो गया है.
फिर भी, यह दोनों पार्टियों के बीच संतुलन साधने की नपी-तुली कोशिश ही है. दरअसल, अमरेली से कांग्रेस की दूसरी पीढ़ी के नेता जेनी ठुम्मर को भी ट्रस्टी बनाया गया है. राजकोट दक्षिण से भाजपा विधायक रमेश टिलाला को भी यही जिम्मेदारी दी गई है. इसके करीब 50 ट्रस्टियों में से कम-से-कम आधे ऐसे हैं जो भाजपा और कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं.
कहानी बस इतनी नहीं
वैसे तो अनार दावा करती हैं कि उन्हें ‘राजनीति पसंद नहीं.’ मगर भाजपा के अंदरूनी सूत्र मानते हैं कि यह पद मिलना चुनावी राजनीति से मिलने वाले किसी लाभ से कम नहीं है. जनवरी के अंत में राजकोट के निकट कागवड कस्बे में आयोजित खोडलधाम संगठन संयोजक सम्मेलन 2026 में उन्हें इसका अध्यक्ष बनाए जाने का ऐलान किया गया. वहां उन्होंने कहा, ”मुझे यह जिम्मेदारी राजनीति में आने या किसी टिकट के लिए नहीं दी गई है; इसका एकमात्र मकसद पाटीदार एकता को मजबूत करना और संगठन का विस्तार करना है.”
फिर भी, इसे पूरी तरह से गैर-सियासी मान लेना एक चूक होगी. दरअसल, दिसंबर 2027 में गुजरात विधानसभा चुनाव होने हैं और 16 नगर निगमों के चुनावों का ऐलान मौजूदा एसआइआर प्रक्रिया के पूरा होते ही हो जाएगा. यह संस्था गुजरात की 182 सीटों वाली विधानसभा की लगभग आधी सीटों पर उम्मीदवारों के चयन को प्रभावित करती है. साथ ही एकजुट कारोबारी समुदाय की आवाज के रूप में यह सरकारी नीतियों पर भी असर डालती है. ऐसे में, ऐसी संस्था के शीर्ष पर होने से सियासी जरूरतों और समुदाय के फायदे को साधने का मौका मिलेगा.
बेशक यह एक सत्ता केंद्र है और अनार की ताजपोशी ऐसे वक्त में हुई, जब राज्य में असली सत्ता परोक्ष रूप से नई दिल्ली में बैठे इसके ‘सर्वशक्तिमान’ आकाओं से संचालित होती है. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के अलावा नए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा और उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी स्थानीय सत्ता केंद्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं जबकि केंद्रीय गृह मंत्री और गांधीनगर के सांसद अमित शाह अपने वफादारों के साथ परिदृश्य पर हावी हैं. ऐसे में अनार का आगमन सत्ता के इस समीकरण में एक नई धुरी को जोड़ता है.
खास बातें
> आनंदी बेन पटेल की बेटी और सामाजिक उद्यमी अनार पटेल यही दावा करती हैं कि उन्हें ‘राजनीति पसंद नहीं’
> मगर खोडलधाम ट्रस्ट गुजरात विधानसभा की कुल सीटों में से आधे पर प्रत्याशियों का चयन प्रभावित करता है 








