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बिहार में राज्यसभा की पांचवीं सीट के लिए महागठबंधन का गणित कहां बिगड़ रहा? बिहार से पांच राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है जिनमें से चार तो सीधे-सीधे NDA को मिलेंगी, लेकिन पांचवीं पर महागठबंधन का भी दावा है

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राज्यसभा में खाली हो रही दस राज्यों की 37 सीटों पर 16 मार्च को चुनाव होने जा रहे हैं. इसके लिए 26 फरवरी को अधिसूचना जारी होनी है. इन सीटों में से पांच बिहार की भी हैं. राज्य के पांच राज्यसभा सांसद- RJD के प्रेमचंद गुप्ता और अमरेंद्रधारी सिंह, JDU के हरिवंश नारायण सिंह और BJP की तरफ से राज्यसभा भेजे गए उपेंद्र कुशवाहा का कार्यकाल 9 अप्रैल, 2026 को समाप्त हो रहा है. विधानसभा चुनाव के बाद बिहार में राजनीति का गणित बदला है और नई परिस्थिति में RJD अपनी दो तो क्या, एक सीट पर भी प्रत्याशी जिता ले तो उसके लिए यह बड़ी सफलता होगी.

माना जा रहा है कि नई परिस्थितियों में JDU और BJP का दो-दो सीटों पर अपने प्रत्याशी राज्यसभा भेजना लगभग तय है. असल लड़ाई पांचवीं सीट को लेकर है, जहां महागठबंधन और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA), दोनों अपने-अपने प्रतिनिधि भेजने की कोशिश में हैं.

दरअसल सीटों का गणित कुछ इस तरह है कि 41 विधायकों के समर्थन से एक राज्यसभा सांसद का चुनाव हो सकता है. इस लिहाज से 89 सीटों वाली BJP के पास दो राज्यसभा सांसद चुनने के बाद नौ विधायकों के मत शेष रहेंगे. 85 सीटों वाली JDU के पास भी तीन विधायक बच जाएंगे. इनके अलावा लोजपा (रामविलास) के 19 विधायक, ‘हम’ के पांच और राष्ट्रीय लोकमोर्चा के चार विधायक हैं. यानी NDA के पास कुल 40 विधायकों के मत अतिरिक्त हैं. वह केवल एक और विधायक के मत का इंतजाम कर ले तो एक अन्य व्यक्ति को राज्यसभा भेज सकता है.

वहीं महागठबंधन में RJD के 25, कांग्रेस के 6, भाकपा-माले के दो, एक माकपा और एक इंडियन इन्क्लूसिव पार्टी के विधायक हैं. यानी कुल 35. इन्हें अपने प्रत्याशी को राज्यसभा भेजने के लिए छह अन्य विधायकों की मदद की जरूरत है. ऐसे में राज्यसभा की इस पांचवीं सीट के लिए इन दोनों गठबंधनों से अलग AIMIM के पांच और बहुजन समाज पार्टी (BSP) का एक विधायक ‘किंग मेकर’ साबित होने वाले हैं. मगर सवाल है कि क्या ये छह विधायक महागठबंधन को समर्थन देंगे?

RJD से जुड़े नेता बताते हैं कि पार्टी यह मानकर चल रही है कि वह दो राज्यसभा सीटें तो किसी भी सूरत में नहीं जीत पाएगी. ऐसे में वह कम से कम एक सीट बचा लेना चाहती है. RJD इस कोशिश में है कि प्रेमचंद गुप्ता को झारखंड में अपने गठबंधन की मदद से दोबारा राज्यसभा भेज दे, मगर दिक्कत यह है कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान RJD के रिश्ते झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) से बिगड़ चुके हैं. हेमंत सोरेन की पार्टी को बिहार में एक भी सीट लड़ने को नहीं दी गई थी.

बिहार की एक सीट जो RJD महागठबंधन, BSP और AIMIM की मदद से हासिल कर सकता है, उसमें भी कई दिक्कतें हैं. RJD के रिश्ते न AIMIM से बेहतर हैं, न BSP विधायक सतीश सिंह यादव से. AIMIM ने बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान RJD से छह सीटों की मांग की थी. इसके लिए पार्टी की प्रदेश इकाई ने राबड़ी आवास के सामने जाकर प्रदर्शन भी किया था. मगर पार्टी ने उनकी मांग को अनसुना कर दिया. वहीं BSP विधायक सतीश सिंह यादव के परिवार का RJD के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे जगदानंद सिंह और उनके परिवार से छत्तीस का आंकड़ा है.

सतीश के चाचा और अभिभावक अंबिका यादव एक समय जगदानंद सिंह के काफी करीबी थे, मगर जब जगदानंद सिंह ने उनके बदले अपने बेटों को तरजीह देना शुरू किया तो वे RJD छोड़कर BSP में चले गए.

ऐसे में RJD के लिए इन दोनों को मनाना आसान नहीं होगा. हालांकि RJD ने इसके लिए अपने दिवंगत सांसद शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब का नाम आगे बढ़ाया है. RJD के बड़े नेता भाई वीरेंद्र ने पत्रकारों के सामने यह नाम पेश किया है. माना जा रहा है कि RJD ने यह नाम इसलिए उछाला है कि शायद मुस्लिम उम्मीदवार के नाम पर AIMIM राजी हो जाए या फिर उस पर राजी होने का मनोवैज्ञानिक दबाव पड़े.

मगर AIMIM इस नाम पर राजी होती नजर नहीं आती. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हसन कहते हैं, “अभी इस बारे में कोई बात नहीं हुई है. पहले RJD की तरफ से प्रस्ताव आए, फिर हमारे नेता ओवैसी साहब इस पर विचार करेंगे. हमारा लक्ष्य भी BJP को हराना है, लेकिन आप यह तय नहीं करेंगे कि हम क्या करेंगे और क्या नहीं. RJD की जिद का क्या नतीजा हुआ, यह हमने विधानसभा चुनाव में देख लिया है.”

वे थोड़ा तल्ख होकर आगे यह भी कहते हैं, “जिस तरह विधानसभा चुनाव में गठबंधन की मांग को लेकर हम उनके दरवाजे पर गए थे, इस बार अगर उन्हें समर्थन चाहिए तो उन्हें हमारे मुख्यालय हैदराबाद के ‘दारुस्सलाम’ में आना चाहिए.” जाहिर है, AIMIM आसानी से समझौते के मूड में नहीं है. इसी बीच 25 फरवरी को JDU के नेता अशोक चौधरी AIMIM विधायक तौसीफ आलम के घर पहुंचे और तौसीफ आलम ने इस मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी है.

शायद AIMIM में भी सब कुछ एकतरफा नहीं है. इस बीच BSP विधायक सतीश सिंह यादव ने कहा है कि इस चुनाव के लिए वे तीसरा मोर्चा बनाकर भी मतदान कर सकते हैं. अब तक महागठबंधन में शामिल इंडियन इन्क्लूसिव पार्टी के संस्थापक विधायक इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता की AIMIM से बढ़ती नजदीकियां भी अलग तरह के संकेत दे रही हैं.

इन हालात में RJD की राह काफी मुश्किल है. दिक्कत यह भी है कि इस बीच कांग्रेस के टूटने की खबरें भी आ रही हैं. ऐसे में जब तक जरूरी वोटों का इंतजाम न हो, RJD अपना प्रत्याशी घोषित करने से बचेगा. क्योंकि अगर दोनों तरफ से प्रत्याशी उतारे गए तो मतदान की नौबत आएगी और उसमें ‘क्रॉस वोटिंग’ का खतरा होगा, जिससे महागठबंधन की कमजोरियां उजागर होने का डर रहेगा.

जहां तक NDA का सवाल है, माना जा रहा है कि वह पांचवीं सीट पर फिर से उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा भेजने की कोशिश करेगा. पहले इस सीट के लिए लोजपा नेता चिराग पासवान की मां के नाम की चर्चा थी. वहीं जीतन राम मांझी की ‘हम’ ने भी इसके लिए जोर लगाना शुरू कर दिया था. मगर चिराग पासवान ने यह स्पष्ट कर दिया कि उनकी मां राज्यसभा नहीं जाएंगी. इसके बाद ‘हम’ भी अपने दावे को लेकर सुस्त नजर आ रही है. ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा की उम्मीदवारी निर्विवाद मानी जा रही है.

कुशवाहा को राज्यसभा भेजने के लिए NDA को बहुत कम मतों की जरूरत है. चर्चा है कि इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता भी पाला बदल सकते हैं. इसके बाद अगर कांग्रेस या AIMIM में टूट हो जाए तो आसानी से उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा भेजा जा सकता है. इस लिहाज से पांचवीं सीट पर NDA का दावा मजबूत लगता है.

इस पूरे मसले पर टिप्पणी करते हुए राजनीतिक विश्लेषक प्रवीण बागी कहते हैं, “मौजूदा स्थिति में तो लगता है कि पांचों की पांचों सीटें NDA के खाते में जाएंगी. महागठबंधन इकलौती सीट तभी हासिल कर सकता है, जब AIMIM उसे खुलकर समर्थन कर दे या फिर RJD किसी ऐसे व्यक्ति को टिकट दे दे जो क्रॉस वोटिंग की स्थिति में अपने दम पर वोटों का इंतजाम कर ले. फिलहाल तो ऐसी सूरत दिखती नहीं, इसलिए लगता है कि अंततः महागठबंधन की एकता को बिखरने से बचाने के लिए RJD इस सीट पर अपनी दावेदारी छोड़ सकता है.”

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