फरवरी की 23 तारीख को बिहार की दो बंद पड़ी चीनी मिलों को खोलने का प्रस्ताव तैयार करने के लिए बिहार सरकार ने राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ लिमिटेड (NFCSF) के साथ MoU साइन किया है. पिछली सदी के आखिरी दशक में बंद हुई इन दोनों चीनी मिलों का DPR और फिजिबिलिटी रिपोर्ट NFCSF तैयार करेगी.
दरभंगा जिले के रैयाम और मधुबनी जिले के सकरी में बंद पड़ी इन चीनी मिलों का परिचालन आने वाले दिनों में बिहार सरकार का सहकारिता विभाग करेगा. इन दोनों के अलावा गोपालगंज के सासामुसा में बंद पड़ी चीनी मिल की भी जल्द शुरुआत होने वाली है. खबर है कि सासामुसा की चीनी मिल को चलाने में एक निजी कंपनी रुचि ले रही है.
इस तरह इन तीनों बंद पड़ी चीनी मिलों की जल्द शुरुआत होने जा रही है और इसके साथ बिहार की एनडीए सरकार ने अपने उस चुनावी वादे को पूरा करने की दिशा में कदम उठा दिया है, जिसके तहत सरकार राज्य की नौ बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से चालू कराएगी, साथ ही 25 नई चीनी मिलें भी खोलेगी. बिहार सरकार ने इन 34 चीनी मिलों को खोलने के लिए अगले पांच सालों का लक्ष्य रखा है. इसके लिए गन्ना उद्योग विभाग के मंत्री संजय कुमार ने राज्य के 25 जिलों के डीएम को पत्र लिखकर नई चीनी मिलों के लिए जमीन तलाशने को कहा है.
जाहिर है, 34 चीनी मिलों के खुलने से राज्य में चीनी मिलों की संख्या 44 हो जाएगी. अभी राज्य में दस चीनी मिलें संचालित हो रही हैं. यह संख्या बिहार में चीनी मिलों के इतिहास में सर्वाधिक होगी. अब तक राज्य में चीनी मिलों की सर्वाधिक संख्या 33 रही है, जो आजादी से पहले थी. तब बिहार देश के कुल चीनी उत्पादन का 40 फीसदी हिस्सा उत्पादित करता था. मगर इसके साथ सवाल यह भी है कि क्या बिहार के किसान इन 44 चीनी मिलों के लिए पर्याप्त मात्रा में गन्ना उपलब्ध करा पाएंगे? अगर हां, तो कैसे?
फिलहाल जैसे ही रैयाम और सकरी की बंद पड़ी चीनी मिलों के खुलने की घोषणा हुई, गन्ना उद्योग विभाग ने दरभंगा और मधुबनी जिले के 2401 गांवों को इन मिलों को गन्ना उपलब्ध कराने के लिए आरक्षित करा लिया है. मतलब यह कि यही गांव इन दोनों मिलों को गन्ना उपलब्ध कराएंगे. मगर बड़ा सवाल यह है कि इन दोनों जिलों में गन्ने की खेती काफी पहले बंद हो चुकी है, क्योंकि दोनों चीनी मिल लगभग 30 साल से बंद थीं. सवाल है कि अब नए सिरे से किसान गन्ने की खेती शुरू कैसे करेंगे?
फिलहाल बिहार में 1.92 लाख हेक्टेयर जमीन पर ही गन्ने की खेती होती है, जो राज्य की कुल कृषि योग्य भूमि का








