केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘भारत की घरेलू पेट्रोकेमिकल मांग वैश्विक औसत का एक-तिहाई है। यह एक खास स्थिति है, क्योंकि हमारी कच्चे तेल की खपत वैश्विक औसत से तीन गुना बढ़ रही है। इसके बावजूद पेट्रोकेमिकल की मांग केवल एक तिहाई ही है। आगे चलकर एकीकृत रिफाइनरी पारंपरिक तरीके से रिफाइनिंग के साथ-साथ पेट्रोकेमिकल का उत्पादन भी करेंगी।’
भारत का लक्ष्य वर्तमान 26 करोड़ टन प्रति वर्ष की रिफाइनिंग क्षमता को बढ़ाकर 30 करोड़ टन से अधिक करना है, ताकि वह विश्व का रिफाइनिंग हब बन सके। भारत के पास वर्तमान में वैश्विक स्तर पर चौथी सबसे बड़ी रिफाइनिंग क्षमता है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां मौजूदा संयंत्रों की रिफाइनिंग क्षमता बढ़ा रही हैं और साथ ही ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल संयंत्र भी स्थापित कर रही हैं। भारत की ग्रीनफील्ड रिफाइनरीज पेट्रोकेमिकल उत्पादन पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही हैं।
भारत पेट्रोलियम की आंध्र प्रदेश में आने वाले समय में शुरू होने वाली रिफाइनरी का लक्ष्य 35 प्रतिशत का पेट्रोकेमिकल इंटेंसिटी इंडेक्स (पीआईआई) हासिल करना होगा। कंपनी ने अपनी 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा, ‘परिष्कृत उत्पादों और पेट्रोकेमिकल्स की अपेक्षित मांग वृद्धि को पूरा करने के लिए हम आंध्र प्रदेश में एक ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स के प्रस्ताव का मूल्यांकन कर रहे हैं, जिसे उच्च पेट्रोकेमिकल गहनता के साथ डिजाइन किया गया है।’
इस बीच, हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने कहा कि राजस्थान के बाड़मेर में उसकी चालू वित्त वर्ष 2025-26 में ही उत्पादन शुरू करने की योजना बना रही ग्रीनफील्ड रिफाइनरी का पीआईआई 26 प्रतिशत होगा। इंडियन ऑयल भी अपनी पेट्रोकेमिकल उत्पादन क्षमता को वर्तमान 43 लाख टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 2030 तक 1.3 करोड़ टन प्रति वर्ष करने की योजना बना रही है। देशभर की अन्य रिफाइनरी में क्षमता वृद्धि भी पेट्रोकेमिकल उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की जा रही है।

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