महज 15 सालों में 86,000 पेटेंट और 16 फीसदी ग्लोबल टैलेंट के साथ भारत अब सिर्फ AI का उपभोक्ता नहीं, बल्कि दुनिया का नया ‘ब्रेन’ बनने की दहलीज पर खड़ा है
युवाओं के जोश और कड़ी सुरक्षा के बीच जब राजधानी दिल्ली में 16 फरवरी को दुनिया का चौथा और भारत का पहला ‘AI समिट’ शुरू हुआ, तो भारतीय टेक जगत का एक ऐसा चेहरा सामने आया जिसने सबको हैरान कर दिया.
‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026’ के पहले ही दिन प्रदर्शित हुई AI Innovations की प्रदर्शनी में 300 से ज्यादा प्रतिभागी अपनी तकनीक का लोहा मनवा रहे हैं. इस मौके पर यूनेस्को (UNESCO) ने ‘इंडिया-AI रेडीनेस असेसमेंट रिपोर्ट’ ने देश की तकनीकी छलांग की पुष्टि करते हुए बताया कि साल 2010 से 2025 के बीच भारत में 86,000 AI पेटेंट फाइल किए गए हैं. यह आंकड़ा इस अवधि के कुल टेक्नोलॉजी पेटेंट आवेदनों का 25 फीसदी से भी अधिक है, जो यह साबित करता है कि AI अब भारत की जड़ों में समा चुका है.
पांच दिनों तक चलने वाले इस महाकुंभ में AI के विभिन्न पहलुओं पर 700 से ज्यादा सेमिनार आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें सुंदर पिचाई, सैम ऑल्टमैन और अलेक्जेंडर वांग जैसे वैश्विक दिग्गज हिस्सा ले रहे हैं. 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधियों और 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्षों की मौजूदगी में जारी की गई यूनेस्को की रिपोर्ट ने न केवल भारत की तैयारियों को सराहा है, बल्कि साइबर सिक्योरिटी के क्षेत्र में भारत की ‘टियर-1’ रैंकिंग (98.40/100 अंक) की भी पुष्टि की है.
हालांकि, रिपोर्ट में AI से उभरते खतरों के प्रति आगाह करते हुए मौजूदा कानूनों को दुरुस्त करने और ‘हाई रिस्क AI सिस्टम्स’ के नियमन को प्राथमिकता देने की सलाह भी दी गई है. भारत के पास फिलहाल दुनिया का 16 फीसदी AI टैलेंट है और अकेले बेंगलुरु में 2,000 से ज्यादा कंपनियां इस क्षेत्र में सक्रिय हैं, लेकिन रिपोर्ट का एक पहलू यह भी है कि अनौपचारिक क्षेत्र (Informal Sector) अभी भी इस दौड़ से बाहर है, जिससे आर्थिक असमानता बढ़ने का डर है.
चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने एक कड़वी सच्चाई भी साझा की कि जहां ऑटोमेशन ने एंट्री लेवल की नौकरियां प्रभावित की थीं, वहीं AI अब मिड-लेवल की नौकरियों के लिए चुनौती बन रहा है. भारत डेटा सेंटर घनत्व (Density) के मामले में अभी 74 देशों में 58वें स्थान पर है और छोटे शहरों में बिजली की अनिश्चित आपूर्ति AI के समान विस्तार में बड़ी बाधा है. हालांकि, स्टार्टअप जगत के दिग्गजों ने इन चुनौतियों को एक बड़े अवसर के रूप में देखा.
‘AI इनोवेटर्स एक्सचेंज’ में शॉपक्लूज और ड्रूम के फाउंडर संदीप अग्रवाल ने बड़े ही दिलचस्प अंदाज में कहा कि अब तक की सभी तकनीकें केवल एक ‘टूल’ थीं, लेकिन AI एक ‘साथी’ है और इस बार मुकाबला एक साथी के साथ है. उन्होंने इसे ‘Survival of the fittest (जो सबसे काबिल वही टिकेगा)’ बताते हुए कहा कि हर नई तकनीक पुराने काम खत्म कर नए अवसर पैदा करती है. समिट के दौरान हेल्थकेयर, फिनटेक और न्यायपालिका में AI के विवेकपूर्ण इस्तेमाल पर भी गहन मंथन हुआ, जिसमें महिला इनोवेटर्स की बढ़ती भागीदारी ने भारत के इस ‘सोवरेन AI’ सफर को और भी समावेशी बना दिया है.








