कोंकण तट के किनारे, जहां अरब सागर का रंग गहरे नीले में बदल जाता है और हवा में नमक व आम के फूलों की मिली-जुली खुशबू घुली रहती है, वहीं बसा है सिंधुदुर्ग। यह महाराष्ट्र के सबसे आकर्षक तटीय जिलों में से एक है। यह समुद्र प्रेमियों के लिए किसी स्वप्न से कम नहीं है। यह गोवा की तरह भीड़-भाड़ वाला नहीं है और न ही मुंबई जितना चर्चित ही है, लेकिन उन यात्रियों को गहराई से तृप्त करता है जो शांति, इतिहास और स्थानीय जीवन को करीब से महसूस करना चाहते हैं। शांत समुद्र तट, समुद्री किले, मालवणी भोजन और ज्वार-भाटे के साथ बहता जीवन, यही इसकी पहचान है।
इतिहास पर नजर रखता किनारा सिंधुदुर्ग को उसका नाम प्रसिद्ध सिंधुदुर्ग किले से मिला है, जिसे 17वीं सदी में छत्रपति शिवाजी महाराज ने बनवाया था। मालवण के पास सीधे समुद्र से उठता यह किला समुद्री रक्षा-कला का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसकी विशाल दीवारें, छिपे हुए प्रवेश द्वार और किले के भीतर मौजूद मीठे पानी के कुएं, सब कुछ शिवाजी महाराज की रणनीतिक सूझबूझ और समुद्री महत्वाकांक्षा की कहानी कहते हैं। सूर्यास्त के समय इसकी प्राचीर पर टहलते हुए, नीचे टकराती लहरों और लौटती मछली नौकाओं के बीच इतिहास किसी स्मृति की तरह नहीं बल्कि जीवंत अनुभव की तरह सामने आता है। इतना ही आकर्षक है विजयदुर्ग किला, जो हालांकि इतना जाना-पहचाना नहीं है। ये दोनों किले मिलकर सिंधुदुर्ग के उस नौसैनिक महत्व को उजागर करते हैं, जिसे मराठा इतिहास में अक्सर जमीनी युद्धों की चमक में भुला दिया गया।








