Home » धर्म और संस्कृति » साड़ी सिर्फ़ एक पहनावा ही नहीं है, बल्कि यह खुद में भारतीय संस्कृति, कला और सदियों के इतिहास को समेटे हुए है.

साड़ी सिर्फ़ एक पहनावा ही नहीं है, बल्कि यह खुद में भारतीय संस्कृति, कला और सदियों के इतिहास को समेटे हुए है.

साड़ी सिर्फ़ एक पहनावा ही नहीं है
Facebook
Twitter
WhatsApp
Telegram

साड़ी को संस्कृत में शाटिका बोलते हैं, यानी ‘कपड़े की पट्टी’. लेकिन भारतीय महिलाओं और कुछ पुरुषों के लिए सूती, सिल्क या लिनन से बनी साड़ियां केवल एक परिधान नहीं हैं. कई लोगों के लिए ये पहचान का हिस्सा भी है.

इसके मुताबिक साड़ी के अस्तित्व के प्रमाण लगभग 3200 ईसा-पूर्व यानी 5000 साल से भी ज़्यादा पुरानी सभ्यताओं में मिलते हैं. इनमें मिस्र की सभ्यता, सिंधु घाटी की सभ्यता और इसके बाद भारत में मौर्यों के अधीन विकसित सभ्यताएं शामिल हैं.

अगर साड़ी के इतिहास की बात की जाए तो इसका ज़िक्र सांस्कृतिक इतिहासकार कमला एस. डोंगरकेरी की किताब ‘द इंडियन साड़ी’ में मिलता है.

मशहूर साड़ी इतिहासकार और लेखिका ऋता कपूर चिश्ती ने अपनी किताब ‘साड़ीज़: ट्रेडिशन एंड बियॉन्ड’ में साड़ी पहनने के करीब 108 पारंपरिक तरीकों के बारे में बताया है.

उन्होंने बीबीसी को बताया, “पूरे भारत में अपने अध्ययन के दौरान हमने हर राज्य में लगभग 2-3 महीने बिताए. अपनी किताब में हमने ज़्यादातर राज्यों में साड़ी पहनने के करीब 7-8 स्टाइल दर्शाए हैं. हालांकि कई और ऐसे स्टाइल हो सकते हैं जो अभी इसमें शामिल न हो पाए हों.”

सीधा पल्लू

साड़ी सिर्फ़ एक पहनावा ही नहीं है
साड़ी सिर्फ़ एक पहनावा ही नहीं है

कमला एस. डोंगरकेरी की किताब ‘द इंडियन साड़ी’ में निवी या मॉर्डन स्टाइल को आधुनिक दौर में भारतीय महिलाओं द्वारा साड़ी पहनने का सबसे सामान्य तरीका बताया गया है. इसमें साड़ी को कमर के चारों तरफ लपेटकर सामने की ओर प्लीट्स बनाई जाती हैं और पल्लू को बाएं कंधे पर डाला जाता है, जिसे आम भाषा में उल्टा पल्लू भी कहा जाता है. यह तरीका न सिर्फ़ देखने में सुंदर है बल्कि पहनने में आसान और रोज़ के काम करने में व्यावहारिक भी होता है.

निवी
साड़ी सिर्फ़ एक पहनावा ही नहीं है
साड़ी सिर्फ़ एक पहनावा ही नहीं है

for more latest news read ucfindianews

 

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments

UCF India News हिंदी के साथ रहें अपडेट

सब्स्क्राइब कीजिए हमारा डेली न्यूजलेटर और पाइए खबरें आपके इनबॉक्स में

और खबरें

जंग के माहौल में भारत ने 50 हजार लोगों को इजरायल भेजने पर सहमति क्यों जताई? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इजरायल यात्रा का जो ज्वाइंट स्टेमेंट जारी हुआ है, उसके मुताबिक भारत अगले पांच सालों में 50,000 कामगार इजरायल भेजेगा

  “मैं यहां रोज़ी-रोटी कमाने आया था, लेकिन खतरनाक बमों और मिसाइलों के हमलों के बीच जान बचाना मुश्किल हो

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए दो दिग्गजों की लड़ाई में क्या तीसरा बाजी मारेगा? छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव सबसे बड़े दावेदार हैं लेकिन इनके बीच एक तीसरा चेहरा भी है

  छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज का कार्यकाल इसी साल जुलाई में खत्म होने जा रहा है. उन्हें

आपकी जेब पर कैसे चोट लगा सकती है ईरान की जंग? अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमले ने वैश्विक तेल बाजार में खलबली मचा दी है. भारत के लिए यह न केवल महंगाई का खतरा है, बल्कि खाड़ी देशों से आने वाले रेमिटेंस और व्यापार के लिए भी बड़ी चुनौती है

  अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग से भारत की बेचैनी बढ़ गई है. भारत का नफा-नुकसान इस

लंबी रेस का पक्का फॉर्मूला सुधार की महत्वाकांक्षा और राजकोषीय विकल्पों से लेकर मैन्युफैक्चरिंग, नौकरियों और निवेशकों के विश्वास तक बोर्ड ऑफ इंडिया टुडे इकोनॉमिस्ट्स (बाइट) ने 1 फरवरी को पेश केंद्रीय बजट के वादों का व्यापक विश्लेषण किया है.

  प्र. आपकी राय में बजट में फोकस वाले तीन सबसे बड़े क्षेत्र कौन से हैं? ● नीलकंठ मिश्र: पहला और सबसे

0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x