Home » सामाजिक मुद्दे » साल 1999 के बाद अब होगा राज्य निर्वाचन आयुक्तों का राष्ट्रीय सम्मेलन; क्या है एजेंडा?

साल 1999 के बाद अब होगा राज्य निर्वाचन आयुक्तों का राष्ट्रीय सम्मेलन; क्या है एजेंडा?

Facebook
Twitter
WhatsApp
Telegram

स्थानीय निकायों के चुनाव कराने वाले राज्य निर्वाचन आयोगों और चुनाव आयोग के बीच बेहतर तालमेल के मकसद से 24 फरवरी को नई दिल्ली में एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन होगा

तकरीबन 27 सालों के बाद चुनाव आयोग 24 फरवरी को राज्य निर्वाचन आयुक्तों का राष्ट्रीय सम्मेलन नई दिल्ली में कराने जा रहा है. राज्य निर्वाचन आयुक्तों का आखिरी ऐसा सम्मेलन 1999 में हुआ था. दरअसल, राज्य निर्वाचन आयुक्तों की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों के चुनाव कराने की होती है. संविधान के 73वें और 74वें संशोधन के बाद इन आयोगों का गठन किया गया था.

दरअसल, कई राज्य चुनाव आयोगों की तरफ से लगातार यह मांग की जा रही थी कि सभी का एक संयुक्त सम्मेलन हो ताकि उन्हें न सिर्फ एक-दूसरे के अनुभवों का लाभ मिले बल्कि चुनाव आयोग और उनके बीच भी बेहतर समन्वय स्थापित हो सके. भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में होने वाले इस सम्मेलन में देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य चुनाव आयुक्त शामिल होंगे. चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी इस सम्मेलन में शामिल रहेंगे. इस सम्मेलन में राज्य चुनाव आयोगों के कानूनी और तकनीकी विशेषज्ञ भी शामिल होंगे.

चुनाव आयोग ने बताया है कि सम्मेलन का प्राथमिक उद्देश्य चुनाव आयोग और राज्य निर्वाचन आयोगों के बीच चुनावी प्रक्रियाओं और लॉजिस्टिक्स के संचालन में तालमेल और सहयोग बढ़ाना है. इस सम्मेलन के जरिए चुनाव आयोग राज्य चुनाव आयोगों को मतदाता सूची तैयार कराने, चुनाव कराने और संवैधानिक कानूनी ढांचे का पालन करते हुए काम करने के बारे में अपने अनुभवों को भी साझा करेगा. इसके अलावा राज्य चुनाव आयोगों के लोग भी अपने अनुभवों को रखेंगे ताकि देश भर में लोकल बॉडी के चुनाव कराने में एकरूपता और पारदर्शिता आए.

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments

UCF India News हिंदी के साथ रहें अपडेट

सब्स्क्राइब कीजिए हमारा डेली न्यूजलेटर और पाइए खबरें आपके इनबॉक्स में

और खबरें

जंग के माहौल में भारत ने 50 हजार लोगों को इजरायल भेजने पर सहमति क्यों जताई? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इजरायल यात्रा का जो ज्वाइंट स्टेमेंट जारी हुआ है, उसके मुताबिक भारत अगले पांच सालों में 50,000 कामगार इजरायल भेजेगा

  “मैं यहां रोज़ी-रोटी कमाने आया था, लेकिन खतरनाक बमों और मिसाइलों के हमलों के बीच जान बचाना मुश्किल हो

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए दो दिग्गजों की लड़ाई में क्या तीसरा बाजी मारेगा? छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव सबसे बड़े दावेदार हैं लेकिन इनके बीच एक तीसरा चेहरा भी है

  छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज का कार्यकाल इसी साल जुलाई में खत्म होने जा रहा है. उन्हें

आपकी जेब पर कैसे चोट लगा सकती है ईरान की जंग? अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमले ने वैश्विक तेल बाजार में खलबली मचा दी है. भारत के लिए यह न केवल महंगाई का खतरा है, बल्कि खाड़ी देशों से आने वाले रेमिटेंस और व्यापार के लिए भी बड़ी चुनौती है

  अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग से भारत की बेचैनी बढ़ गई है. भारत का नफा-नुकसान इस

लंबी रेस का पक्का फॉर्मूला सुधार की महत्वाकांक्षा और राजकोषीय विकल्पों से लेकर मैन्युफैक्चरिंग, नौकरियों और निवेशकों के विश्वास तक बोर्ड ऑफ इंडिया टुडे इकोनॉमिस्ट्स (बाइट) ने 1 फरवरी को पेश केंद्रीय बजट के वादों का व्यापक विश्लेषण किया है.

  प्र. आपकी राय में बजट में फोकस वाले तीन सबसे बड़े क्षेत्र कौन से हैं? ● नीलकंठ मिश्र: पहला और सबसे

0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x