नवजात शिशु जन्म से ही संगीत की ताल समझने लगता है। यह खुलासा इटालियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने किया है। ‘पीएलओएस बायोलॉजी’ जर्नल में प्रकाशित स्टडी में बताया गया कि नवजात शिशु न सिर्फ रिद्म पहचानते हैं, बल्कि अगली बीट का अनुमान भी लगा लेते हैं।
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर उषा गोस्वामी के अनुसार, यह शोध भाषा सीखने की प्रक्रिया को समझने में भी मदद करता है। जिन बच्चों की रिद्म समझने की क्षमता बेहतर होती है, वे भाषा जल्दी बोलना सीखते हैं।
कैसे किया शोध
49 नवजात शिशुओं पर ईईजी टेस्ट किया गया। बच्चों को सोते समय ईयरफोन से पियानो की धुनें सुनाई गईं। सिर पर सेंसर लगाए गए। संगीत में जानबूझकर ताल व धुन में बदलाव किए गए। जब ताल बदली, तो बच्चों के दिमाग में हैरानी के संकेत दिखे। लेकिन जब सुरों में बदलाव हुआ, तो खास प्रतिक्रिया नहीं मिली।
गर्भ में ही विकसित हो जाती है ताल की समझ
वैज्ञानिकों का मानना है कि रिद्म की समझ गर्भ में ही विकसित होने लगती है। बच्चा मां की धड़कन सुनता है, जो लयबद्ध होती है। मां के चलने से पैदा होने वाली गति से भी समय और पूर्वानुमान का अहसास होता है। गर्भ के आखिरी महीनों में बाहरी संगीत की धुनें भले ही धुंधली सुनाई दें, लेकिन उनकी ताल बच्चे तक साफ पहुंचती है।








