लगता है आज की दुनिया जैसे अपनी धुरी से हिल गई है. आर्थिक बेचैनी और राजनैतिक उथल-पुथल महाद्वीपों में फैल रही है और हमारे पड़ोस तक इसका असर दिख रहा है. एक विदेश नीति विशेषज्ञ के शब्दों में, हर दिन एक नई वैश्विक और क्षेत्रीय उथल-पुथल और फिर उसके नए सिरे उभरते हैं. ऐसे माहौल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साफ तौर पर अलग नजर आते हैं. वे राजनैतिक और आर्थिक मजबूती की नायाब मिसाल पेश करते दिखते हैं. जब दुनिया एक संकट से दूसरे संकट की ओर डगमगा रही है, ऐसे में मोदी का नेतृत्व स्थिरता का प्रतीक बन गया है.
यही बड़ी वजह है कि ताजा छमाही इंडिया टुडे-सीवोटर देश का मिज़ाज सर्वे में प्रधानमंत्री को जबरदस्त समर्थन मिला है. यह उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता, सरकार के कामकाज और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की संसदीय स्थिति, तीनों स्तरों पर दिखता है. 2024 के आम चुनाव में पार्टी के अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन के बाद जो वापसी हुई है, वह चौंकाने वाली है. 2024 में लोकसभा की 543 सीटों में से भाजपा को 240 सीटें मिली थीं.
यह अपने दम पर बहुमत के लिए जरूरी 272 सीटों से 32 कम थीं और 2019 में जीती गई 303 सीटों से काफी नीचे. 2014 में केंद्र में सत्ता में आने के बाद यह पहला मौका था, जब भाजपा को सरकार बनाने के लिए अपने सहयोगियों पर निर्भर होना पड़ा. 








