पुलिस पायाके मुताबिक, आग सुबह करीब 3 बजे लगी। दमकल की 12 गाड़ियों ने करीब 7 घंटे की मशक्कत के बाद सुबह 10 बजे आग पर काबू। हालांकि गोदाम के कुछ हिस्सों में देर शाम तक धुआं और आग की लगी रही।
शाम करीब 5 बजे तीन शव मिले। बाद में तलाशी के दौरान पांच और शव बरामद किए गए। बारुईपुर पुलिस जिला एसपी शुभेंदु कुमार ने बताया कि सभी शव इतनी बुरी तरह झुलसे हैं कि पहचान संभव नहीं है।
कई मजदूर लापता हैं।
शुरुआत में 6 लोगों के लापता होने की सूचना मिली थी, लेकिन परिजनों का कहना है कि यह संख्या 10 से ज्यादा हो सकती है। गोदाम में एक डेकोरेटिंग कंपनी और एक लोकप्रिय मोमो चेन के मजदूर काम करते थे, जो वहीं अस्थायी कमरों में रहते थे।
चार मजदूर ने समय रहते फैक्ट्री से बाहर भागकर अपनी जान बचाई। मृतक और लापता मजदूर पुरबा मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर और दक्षिण 24 परगना जिलों के रहने वाले हैं।
बीजेपी विधायक अशोक डिंडा ने आरोप लगाया कि आधी रात को गोदाम का मुख्य गेट बंद था, जिससे कई मजदूर बाहर नहीं निकल सके।

दीवारें तोड़कर धुआं निकालने की कोशिश राज्य के बिजली मंत्री आरूप बिस्वास ने कहा कि घना धुआं हटने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि अंदर कोई और फंसा था या नहीं। उन्होंने बताया कि कोलकाता नगर निगम की डिमोलिशन टीम को दीवारें तोड़ने के लिए बुलाया गया ताकि धुआं बाहर निकल सके।
दमकल मंत्री बोले- सुरक्षा नियमों की जिम्मेदारी मालिकों की
फायर सर्विस मंत्री सुजीत बोस ने कहा कि रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। मौके पर हाई-मास्ट लाइटें लगाई गई हैं। फायर सेफ्टी पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि साल में दो बार फायर ऑडिट होता है, लेकिन नियमों का पालन कराना मालिकों और कंपनी अधिकारियों की जिम्मेदारी है।








