माघी पूर्णिमा का महत्व और भी अधिक बढ़ गया है। इस तिथि पर तीर्थराज प्रयाग का कल्पवास भी खत्म होता है। माघ पूर्णिमा पर गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है।
माघी पूर्णिमा पर करें ये शुभ काम
माघ पूर्णिमा पर गंगा, यमुना, सरस्वती संगम, नर्मदा, शिप्रा जैसी पवित्र नदियों में स्नान नहीं कर पा रहे हैं, तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। स्नान करते समय सभी तीर्थों का और नदियों का ध्यान करना चाहिए।
माघी पूर्णिमा पर स्नान के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं। इसके लिए तांबे के लोटे में जल, कुमकुम, लाल फूल, चावल डालें और फिर ऊँ सूर्याय नम: मंत्र जप करते हुए सूर्य को अर्घ्य चढ़ाएं।
घर के मंदिर में अपने इष्टदेव का विधिवत अभिषेक करें। पूजा-पाठ के बाद जरूरतमंद लोगों को वस्त्र, तिल-गुड़, जूते-चप्पल, ऊनी वस्त्र, खाना, अनाज, धन का दान करें। किसी गोशाला में गायों को हरी घास खिलाएं। गायों की देखभाल के लिए धन दान करें।
माघ पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु और चंद्रदेव की पूजा खासतौर पर करनी चाहिए। दक्षिणावर्ती शंख में दूध, जल, पंचामृत भरकर महालक्ष्मी और भगवान विष्णु का अभिषेक करें। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें।








