सोना चांदी में गिरावट से डॉलर को फायदा
जब डॉलर मजबूत होता है तो सोना चांदी में कमजोरी आती है। क्योंकि डॉलर इंडेक्स जब ऊपर जाता है तब अन्य देशों की करेंसियों जैसे रुपया, यूरोप, येन की तुलना में डॉलर महंगा हो जाता है। इससे विदेशी ख़रीदारों के लिए सोना चांदी जैसी खरीदारी भी महंगी हो जाती है। अमेरिका चाहता है कि डॉलर बेस इकोनामी बनी रहे जिसके लिए वह सोने चांदी की कीमतें बढ़ने के विपरीत सोच रखता है। दुनिया में डॉलर के प्रभुत्व को बनाए रखने के लिए कमोडिटी मार्केट में गिरावट जरुरी है। फलों की कुछ विशेष परिस्थितियों में ऐसा हो सकता है जब सोने चांदी में तेजी के साथ ही डॉलर में भी मजबूती आए जैसे जियो पॉलिटिकल टेंशन।
क्यों डॉलर डोमिनेंस से बाहर निकलना चाहती है दुनिया?
दुनिया भर में अभी डॉलर का डोमिनेंस बरकरार है। लेकिन धीरे-धीरे चीन रूस जैसे बड़े देशों ने इससे बाहर निकलने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। क्योंकि रूस और यूक्रेन के बीच वॉर में अमेरिका ने रूस के 2 बिलियन से ज्यादा डॉलर फ्रीज कर दिए थे। जिससे दुनिया को बड़ा झटका लगा। यह समझ में आया कि यदि डॉलर के प्रभुत्व से बाहर नहीं निकला गया तो अमेरिका अपनी मनमानी करता रहेगा। इसके बाद चीन, रूस जैसे देशों ने डॉलर छोड़ कमोडिटी में ट्रेड शुरू किया। साल 2024 में डॉलर 40% का डोमेन्स था जो अब घटकर 18% हो गया। इसलिए अमेरिका डॉलर के
डोमिनेंस को बनाए रखना चाहता है।

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