माघ मेला में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य पद को लेकर विवाद जारी है. इस विवाद ने शंकराचार्य परंपरा और मठाम्नाय अनुशासन की गहनता को उजागर किया है, जो आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार प्रमुख मठों के नियमों का संग्रह है
माघ मेला में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुआ विवाद अभी भी चर्चा का विषय बना हुआ है. इसमें ये सवाल भी उठ खड़ा हुआ है कि क्या स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद वाकई शंकराचार्य हैं? इन सवालों की परतों को एक-एक करके उठाएं तो शंकराचार्य की परंपरा के बहुत से रहस्य सामने आते हैं. इनमें ही एक रहस् है ‘मठाम्नाय’ या मठ अनुशासन. मठाम्नाय को एक किताब समझिए, जिसमें शंकराचार्य पद से जुड़े नियम और मठों-पीठों के अनुशासन दर्ज हैं. देश के चारों कोनों में बने मठों के लिए ‘मठाम्नाय’ एक तरीके से उनके अपने एक संविधान की तरह है, जिसे खुद आदि शंकराचार्य ने आठवीं सदी में लिखा था.

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