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बजट 2026 की आहट के साथ ही देश के वरिष्ठ नागरिकों की उम्मीदें एक बार फिर जोर पकड़ने लगी हैं। यह एक ऐसा वर्ग है जिसकी कमाई का मुख्य जरिया सैलरी नहीं, बल्कि जीवन भर की जमा पूंजी से मिलने वाला ब्याज होता है।

बजट 2026 की आहट
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ब्याज आय पर छूट और TDS का झंझट खत्म करने की मांग

रिटायरमेंट के बाद ज्यादातर लोग अपनी जरूरतों के लिए बैंक एफडी और पोस्ट ऑफिस की योजनाओं पर ही निर्भर रहते हैं। अभी इनकम टैक्स की धारा 80TTB के तहत ब्याज से होने वाली आमदनी पर 50,000 रुपये तक की छूट मिलती है। विनीत का कहना है कि इस सीमा को बढ़ाकर 75,000 रुपये या 1 लाख रुपये किया जाना चाहिए, ताकि ब्याज पर जीने वाले बुजुर्गों को कुछ ज्यादा राहत मिल सके।

स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ता बोझ और सेक्शन 80D

बुजुर्गों के लिए सबसे बड़ी आर्थिक चिंता इलाज का खर्च होता है। मेडिकल खर्च आम महंगाई से कहीं तेज़ी से बढ़ रहा है, खासकर पुरानी बीमारियों के इलाज में। फिलहाल इनकम टैक्स के सेक्शन 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर 50 हजार रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है।

मेडिकल महंगाई को देखते हुए मांग है कि इस छूट की सीमा कम से कम दोगुनी करके 1 लाख रुपये कर दी जाए। अगर सरकार हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर मिलने वाली यह राहत बढ़ाती है, तो बुजुर्गों को बेहतर इलाज और बीमा कवर लेने में आसानी होगी और उन पर पड़ने वाला आर्थिक दबाव भी काफी कम हो जाएगा।

कुल मिलाकर सीनियर सिटीजन की यह विश लिस्ट उनकी रोजमर्रा की परेशानियों को कम करने और उन्हें सम्मान के साथ रिटायरमेंट की जिंदगी जीने में मदद करने वाला कदम मानी जा रही है।

बजट 2026 की आहट
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