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EU से ट्रेड डील कैसे यूरोप को भारतीय गहनों के लिए एक बड़ा बाजार बनाने जा रही? इंडियन जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) का अनुमान है कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) के कारण तीन वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 10 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है

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भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने न केवल भारत के रत्न और आभूषण से जुड़े कारोबारियों के लिए दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार खोल दिया है, बल्कि व्यापार बाधाओं को कम करने में भी मदद की है. भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय संघ के बाजार में चीन, थाईलैंड और हांगकांग जैसे प्रतिस्पर्धियों पर लागत और कीमत के मामले में फायदा भी मिला है.

FTA के कारण यूरोपीय संघ के 27 देशों में कीमती आभूषणों पर लगने वाले 2 से 4 फीसद आयात शुल्क हटा दिए गए हैं, जिससे देश के आभूषण कारोबारियों के लिए बड़ा बाजार खुल गया है. पहले यूरोपीय संघ के देश खुद एक-दूसरे से आभूषण खरीदते थे, जिसमें इटली, फ्रांस, यूके और तुर्की प्रमुख आपूर्तिकर्ता देश थे. इसके अलावा चीन, थाईलैंड और हांगकांग से भी यहां बड़ी मात्रा में आभूषणों की आपूर्ति होती थी.

2024 में भारत ने कुल 30 अरब डॉलर के रत्न और आभूषण दूसरे देशों में निर्यात किए, जिसमें यूरोपीय संघ को होने वाला निर्यात करीब 628 मिलियन डॉलर था. यूरोपीय देशों में होने वाले कुल निर्यात में करीब 57.30 करोड़ डॉलर के कीमती आभूषण थे, जबकि 5.5 करोड़ डॉलर के फैशन आभूषण. फैशन ज्वैलरी या कॉस्ट्यूम ज्वैलरी पीतल, मिश्र धातु, प्लास्टिक या कांच जैसी गैर-कीमती धातुओं की बनी होती है.

रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (GJEPC) को उम्मीद है कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से तीन वर्षों के भीतर द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 10 अरब डॉलर (लगभग 91,000 करोड़ रुपये) तक पहुंच जाएगा. वर्तमान में यूरोपीय संघ के साथ द्विपक्षीय व्यापार 5.2 अरब डॉलर का है, जिसमें निर्यात 2.7 अरब डॉलर (कुल निर्यात का 8.92 फीसद) और आयात 2.5 अरब डॉलर है.

हाल में हुए इस समझौता से रत्न एवं आभूषण सेक्टर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है. GJEPC के अध्यक्ष किरीट भंसाली का कहना है कि यह समझौता गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के प्रमुख केंद्रों से कीमती आभूषणों (साधारण और जड़े हुए) और चांदी एवं नकली आभूषणों के निर्यात को बढ़ावा देगा. उनका कहना है, “विशेष रूप से अमेरिका को निर्यात में 44 फीसद की गिरावट के बाद यह समझौता भारतीय कारोबारियों को हुए नुकसान की भरपाई करने में मदद करेगा.”

हालांकि, GJEPC के कार्यकारी निदेशक सब्यसाची रे ने चेतावनी दी है कि अमेरिका के विपरीत यूरोपीय संघ एक उच्च-मूल्य वाला बाजार है जो बेहतर फिनिशिंग गुणवत्ता और प्रासंगिक डिजाइन वाले प्रीमियम प्रोडक्ट पर ध्यान केंद्रित करता है. ऐसे में जेम एंड ज्वैलरी सेक्टर से जुड़े भारतीय कारोबारियों को भी FTA से बेहतर लाभ उठाने के लिए अपनी क्षमताओं को बढ़ाना होगा.

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