शिक्षा के क्षेत्र में सुधारों को लेकर राजस्थान ने देश में बेहतरीन काम कर दिखाया है. मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से कराई गई परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) में राजस्थान ने उल्लेखनीय प्रगति करते हुए 581.5 अंक हासिल किए हैं. PGI में इस बार राजस्थान ने 32 अंक की बड़ी छलांग लगाई है. पिछली बार राजस्थान का स्कोर 549 अंक था और वह देश में 15वें नंबर पर था. 32 अंकों की छलांग के साथ ही राजस्थान 15 वें पायदान से चाैथे पायदान पर आ गया है.
दिल्ली, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के बाद राजस्थान ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में सबसे जोरदार प्रदर्शन किया है और सूबे ने तमिलनाडु, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है. PGI ने विभिन्न राज्यों के सरकारी स्कूलों में वर्ष 2024 तक की स्थिति को लेकर यह रिपोर्ट तैयार की है.
आधारभूत ढांचा और सुविधाओं के क्षेत्र में राजस्थान ने 12 अंकों की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की है. स्कूलों में कक्षा-कक्ष व रसोईघरों की उपलब्धता, सोलर पैनल, वर्षा जल संरक्षण, पेयजल सुविधा और सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनों जैसी व्यवस्थाओं के आधार पर यह आकलन किया गया है.
उत्तराखंड, ओडिशा, मणिपुर और कर्नाटक जैसे राज्यों का इस श्रेणी में प्रदर्शन पिछले वर्ष की तुलना में कमजोर रहा है. स्कूलों के प्रबंधन में शासन प्रक्रिया के स्तर पर राजस्थान ने इस बार बड़ी उपलब्धि हासिल की है. पिछले वर्ष जहां इस श्रेणी में राज्य को 47 अंक मिले थे, वहीं इस बार हरियाणा के बाद राजस्थान देश का दूसरा सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाला राज्य बन गया है. राजस्थान ने इस श्रेणी में 17 अंकों की बड़ी बढ़त बनाई है. सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की डिजिटल उपस्थिति, केंद्र से मिलने वाले शिक्षा बजट का समय पर उपयोग, बच्चों का आधार लिंकिंग और करियर गाइडेंस जैसी व्यवस्थाओं में सुधार इसका प्रमुख कारण रहा.
टीचर्स एजुकेशन एंड ट्रेनिंग श्रेणी में भी राजस्थान ने चार अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की है. शिक्षकों की योग्यता, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और प्राथमिक से उच्च माध्यमिक स्तर तक शिक्षण गुणवत्ता में सुधार का सकारात्मक प्रभाव सामने आया है. हालांकि, समग्र प्रदर्शन में राजस्थान ने बड़ी छलांग लगाई है, मगर सीखने के परिणाम और गुणवत्ता की पहुंच जैसी श्रेणी में प्रदेश में ओर सुधार की आवश्यकता है. इस श्रेणी में बिहार का प्रदर्शन देश में सबसे बेहतर रहा है.
इस उपलब्धि पर राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का कहना है, ”हमने सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता और आधुनिकता पर जोर दिया है. डिजिटल व स्मार्ट क्लासरूम, छात्रों के सीखने की क्षमता के लिए ‘प्रखर राजस्थान’ जैसे आयोजन, पढ़ाई के लिए तकनीकी टूल्स व एप्स का इस्तेमाल जैसी गतिविधियों के कारण राजस्थान ने शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है. हमें उम्मीद और भरोसा है कि आने वाले समय में राजस्थान नंबर वन पर होगा.”
राजस्थान अब तक ड्रॉप आउट (बीच में पढ़ाई छोड़ देना) के लिए देशभर में खासा बदनाम था मगर पिछले कुछ सालों में ड्रॉप आउट रेट में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है. प्राथमिक स्तर पर ड्रॉप आउट रेट 7.6 से घटकर 3.6 फीसदी पर आ गई है. उच्च प्राथमिक स्तर पर ड्रॉप आउट रेट 6.8 से कम होकर 3.6 फीसदी रह गई है. माध्यमिक स्तर पर बीच में ही स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की दर 11.1 से घटकर 7.7 फीसदी पर आ गई है.
राजस्थान के 15वें से चौथे स्थान तक आने की यह यात्रा केवल आंकड़ों का उछाल नहीं, बल्कि नीतियों के धरातल पर उतरने की कहानी है. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यही रफ्तार और प्रतिबद्धता प्रदेश को देश में शिक्षा के शिखर तक पहुंचा पाएगीॽ
73 बिंदुओं पर हुआ आकलन
सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों 73 बिंदुओं के आधार पर परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स तैयार हुआ है. इसमें कक्षा 3, 5 में भाषा व गणित विषय सीखने की क्षमता, 10वीं और 12वीं में व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद स्वरोजगार में लगे छात्रों का प्रतिशत, पिछले शैक्षणिक सत्र के दौरान छात्रों के स्वास्थ्य परीक्षण का प्रतिशत से लेकर सेकंडरी और हायर सेकंडरी स्कूलों में सेनेटरी नैपकिन वेंडिग मशीनों का प्रतिशत, स्कूल सत्र प्रारंभ होने के एक माह के भीतर निशुल्क पाठ्य पुस्तक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का प्रतिशत, सरकारी, गैर सरकारी स्कूल व आंगनबाड़ी में बाल वाटिकाएं शुरू किए जाने का प्रतिशत जैसे मानक शामिल थे.
हालांकि PGI के इस आकलन में कंप्यूटर शिक्षा को शामिल नहीं किया गया. डिजिटल पढ़ाई के क्षेत्र में देश के अन्य राज्यों की तरह राजस्थान के हालात भी अच्छे नहीं हैं. प्रदेश में अभी तक 20 हजार में से 6 हजार से ज्यादा स्कूलों में कंप्यूटर लैब स्थापित नहीं हो पाई हैं.








