भारत की 7,516 किलोमीटर लंबी तट रेखा समुद्री मार्ग से भारत के लिए जहां कारोबार की असीमित संभावनाओं का द्वार है तो वहीं सुरक्षा के लिहाज से एक चुनौती भी रही है. तटीय रास्तों से तस्करी की खबरें अक्सर आती हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी कई बार तटीय सीमाओं की सुरक्षा व्यवस्था को और चाक-चौबंद बनाने की बात दोहरा चुके हैं.
इस दिशा में अब केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाला केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी CISF ने एक अहम पहल की है. तटीय क्षेत्रों में रह रहे लोगों को ‘तट प्रहरी’ बनाकर तटीय सुरक्षा का काम जनभागीदारी से करने के लिए CISF ने लगातार दूसरे साल साइकलोथॉन का आयोजन किया है.
साइकलोथॉन मतलब साइकल पर सवार टोलियां जो एक जगह से दूसरी जगह यात्रा करती हैं. इन दिनों साइकलोथॉन सामाजिक जागरूकता के लिए एक महत्वपूर्ण ईवेंट के तौर पर उभरा है और CISF भी इस लिहाज से एक अहम काम के लिए इसका इस्तेमाल कर रहा है.
दरअसल, तटीय क्षेत्रों में बसे लाखों मछुआरे और तटीय गांवों में रहने वाले लोग ही देश की तटीय सीमाओं पर हो रही गतिविधियों से सबसे पहले वाकिफ होते हैं. वे ही सबसे पहले किसी भी अनहोनी जैसे नशीले पदार्थों की तस्करी, हथियारों की घुसपैठ या किसी अन्य संदिग्ध गतिविधि को देख पाते हैं. CISF इस साइकलोथॉन के जरिए इन्हीं समुदायों को जागरूक कर रहा है कि वे अब सिर्फ मछुआरे या गांववासी नहीं बल्कि देश की समुद्री सीमा के प्रथम प्रहरी हैं.
2025 में जब इसके पहले संस्करण का आयोजन हुआ था तो इस साइकलोथॉन में शामिल लोग गांवों में रुकते नहीं थे. इस बार ये रास्ते के गांवों में रुक रहे हैं. पहले संस्करण में महिला साइकलिस्ट की संख्या 15 फीसदी से नीचे थे तो इस बार उनकी भागीदारी 50 फीसदी है.
28 जनवरी को शुरु हुए इस साइकलोथॉन का समापन 22 फरवरी को हो रहा है. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इस यात्रा की शुरुआत की थी. इस साइकलोथॉन के दौरान CISF ने 52 गांवों को गोद लिया है. अगले एक साल तक इन गांवों में CISF की 47 तटीय इकाइयां लगातार काम करेंगी. CISF यह काम ओएनजीसी, पोर्ट अथॉरिटीज और अन्य समुद्री एजेंसियों के साथ मिलकर सीएसआर फंड से कर रही है. इन गांवों में स्कूल, खेल मैदान, सामुदायिक भवन, स्वच्छता अभियान, पौधरोपण और ड्रग्स-तस्करी विरोधी कार्यक्रम चलाए जाएंगे.
इस मामले में यह साइकलोथॉन अलग है कि यह किसी गांव के लिए सिर्फ एक दिन का आयोजन नहीं बल्कि एक वर्ष तक चलने वाला नियमित अभियान है. अगले एक वर्ष के दौरान इन गांवों में स्थानीय लोगों को ‘तट प्रहरी’ के रूप में तैयार करने के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र, वर्कशॉप और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बताया जाएगा कि संदिग्ध नाव, असामान्य गतिविधि या अजनबी चेहरे को कैसे पहचानें और तुरंत किस नंबर पर सूचना दें.
इस साल राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर भारत सरकार की तरफ से कई कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है. इसलिए इस बार CISF ने अपनी साइकलोथॉन को भी ‘वंदे मातरम कोस्टल साइकलोथॉन-2026’ का नाम दिया है. इस 25 दिवसीय यात्रा के दौरान CISF की दो साइकिल टीमें एक साथ पश्चिम बंगाल के बक्खाली और गुजरात के लखपत से रवाना हुईं. ये टीमें तकरीबन तटीय क्षेत्रों में करीब 6,500 किलोमीटर का सफर तय करेंगी. इस दौरान यह यात्रा नौ राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों से होते हुए कोच्चि में समाप्त होगी.
इस साइकलोथॉन के बारे में CISF के डीजी प्रवीर रंजन कहते हैं, ”CISF की वंदे मातरम कोस्टल साइकलोथॉन-2026 सिर्फ 6,500 किलोमीटर के समुद्र तट की यात्रा भर नहीं है. यह भरोसे, पार्टनरशिप और राष्ट्रीय लक्ष्यों की यात्रा है. समुद्र के किनारे रहने वाले समुदायों से जुड़कर, अपने युवाओं को प्रेरित करके और समुद्री सुरक्षा के बारे में जागरूकता बढ़ाकर, हम एक सीधी सी बात को दोहरा रहे हैं कि सुरक्षित तट एक खुशहाल भारत की नींव हैं. यह पहल न सिर्फ जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा के लिए बल्कि समुद्र पर निर्भर लाखों लोगों की उम्मीदों और रोजी-रोटी की सुरक्षा के लिए हमारी प्रतिबद्धता को दिखाती है.”
केंद्रीय सशस्त्र बलों द्वारा आयोजित सबसे लंबी तटीय साइकलोथॉन के तौर पर यह यात्रा इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्डस में भी दर्ज हो सकती है. इस बारे में CISF के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अजय दहिया कहते हैं, ”CISF वंदे मातरम कोस्टल साइकलोथॉन-2026 सबसे लंबे कोस्टल साइकलोथॉन और सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स की सबसे बड़ी भागीदारी के लिए इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज होने के दरवाजे पर खड़ी है. हालांकि, यह एक रिकॉर्ड से कहीं ज्यादा हमारे जवानों और नागरिकों की मिली-जुली भावना को दिखाता है, जो तटीय सुरक्षा और देश के गौरव को मजबूत बनाने के साझा मिशन में एकजुट हैं.”
इस यात्रा के बारे में एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आखिर किस आधार पर यह तय किया गया कि आधी साइकलिस्ट महिलाएं रहेंगी. इस बारे में CISF के अधिकारी बताते हैं कि तटीय क्षेत्रों में महिलाएं मछली पकड़ने, सूखाने, बेचने और घर-परिवार संभालने में अग्रणी भूमिका निभाती हैं. उनके बीच जागरूकता का प्रसार प्रभावी ढंग से हो, इसलिए महिला साइकलिस्ट की संख्या इस बार बढ़ाई गई. CISF के अधिकारी बताते हैं कि महिलाओं के लिए तटीय महिलाओं से संवाद करना अधिक प्रभावी साबित होगा.









