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हिमाचल घूमना अब हो जाएगा महंगा; टूरिस्ट इंडस्ट्री को फायदा होगा या नुकसान? हिमाचल प्रदेश सरकार 1 अप्रैल 2026 से बाहर से आने वाले वाहनों की एंट्री फीस बढ़ाने जा रही है

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अगर आप आने वाले दिनों में कुल्लू-मनाली-शिमला यानी हिमाचल प्रदेश घूमने का प्लान बना रहे हैं तो जेब थोड़ा ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है. राज्य सरकार ने बाहर से आने वाले वाहनों पर लगने वाली एंट्री फीस में बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है. नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी. इसके बाद हिमाचल में दाखिल होते ही पहले से ज्यादा शुल्क देना होगा.

सरकार का कहना है कि ये फैसला राज्य की आर्थिक स्थिति को देखते हुए लिया गया है. हिमाचल पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है और सरकार को नए राजस्व स्रोतों की जरूरत है. इसी वजह से एंट्री फीस में संशोधन किया गया है. हालांकि ये साफ किया गया है कि बढ़ा हुआ शुल्क सिर्फ दूसरे राज्यों में रजिस्टर गाड़ियों पर ही लागू होगा. हिमाचल नंबर वाले वाहनों को इससे कोई नुकसान नहीं होगा.

कितना असर होगा?

राज्य में कुल 55 एंट्री बैरियर हैं जहां बाहर से आने वाले वाहनों से स्टेट एंट्री फीस ली जाती है. इनमें परवाणु, बद्दी, ऊना, नूरपुर, बिलासपुर और सिरमौर जैसे रास्ते शामिल हैं. सरकार अब इन सभी बैरियरों पर FASTag सिस्टम लागू करने की तैयारी में है, ताकि टैक्स वसूली में देरी और गड़बड़ी न हो. स्टेट एंट्री फीस अब तक मैनुअल तरीके से पर्ची बनाकर वसूली जाती थी.

नई दरों के मुताबिक अब निजी कार या लाइट मोटर व्हीकल से आने वालों को 170 रुपए एंट्री फीस देनी होगी. अभी तक यही शुल्क 70 रुपये था. यानी करीब ढाई गुना बढ़ोतरी. ज्यादा सवारी ले जाने वाले वाहनों के लिए भी फीस बढ़ाकर 170 रुपये कर दी गई है. भारी वाहनों के लिए ये फीस 900 रुपये तय की गई है. कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल होने वाली मशीनों जैसे जेसीबी, लोडर, कंक्रीट फोर्सर पर भी अब ज्यादा शुल्क लगेगा.

इस पर क्या कहना है लोगों का?

सरकार का दावा है कि इस फैसले से मिलने वाला अतिरिक्त पैसा राज्य की सड़कों, ट्रैफिक व्यवस्था और पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं पर खर्च किया जाएगा. अधिकारियों का कहना है कि पर्यटकों को जो ज्यादा पैसा देना पड़ेगा उसका फायदा उन्हें बेहतर सुविधाओं के रूप में मिलेगा.

लेकिन पर्यटन कारोबार से जुड़े लोग इस फैसले को लेकर थोड़े चिंतित हैं. होटल और ट्रैवल इंडस्ट्री का कहना है कि हिमाचल पहले ही महंगा टूरिस्ट स्टेट बनता जा रहा है. होटल के किराए, टैक्सी भाड़े और खाने-पीने का खर्च लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में एंट्री फीस बढ़ने से उन लोगों पर असर पड़ेगा जो लिमिटेड बजट में घूमने आते हैं. खासकर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश से अपनी गाड़ियों में आने वाले सैलानी इससे ज्यादा प्रभावित होंगे.

क्या कहते हैं आंकड़े?

यह फैसला ऐसे वक्त में आया है जब हिमाचल में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है. हिमाचल प्रदेश टूरिज्म डिपार्टमेंट के आंकड़े बता रहे हैं कि साल 2024 में करीब 1 करोड़ 80 लाख घरेलू पर्यटक हिमाचल पहुंचे थे. इसके अलावा करीब 83 हजार विदेशी सैलानी भी यहां आए. ये 2024 तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है. सिर्फ 2024 के पहले छह महीनों में ही एक करोड़ से ज्यादा लोग हिमाचल घूमने पहुंचे थे.

गर्मियों के मौसम में शिमला, मनाली, धर्मशाला और कसोल जैसे इलाकों में हालात ऐसे हो गए थे कि सड़कों पर जाम और पार्किंग की समस्या आम हो गई थी. सरकार का कहना है कि बढ़ते पर्यटन के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव भी बढ़ा है. इसी वजह से अतिरिक्त राजस्व की जरूरत महसूस की जा रही है.

फिलहाल हिमाचल में करीब 10 हजार से ज्यादा रजिस्टर्ड होटल और होमस्टे हैं. सरकार इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा देने की बात कर रही है और इसके तहत दर्जनों नए पर्यटन स्थलों को डेवलप किया जा रहा है. अधिकारियों का मानना है कि अगर सही तरीके से निवेश किया गया तो पर्यटन का फायदा राज्य और स्थानीय लोगों दोनों को मिलेगा.

जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि एंट्री फीस में बढ़ोतरी का असर कुछ समय के लिए दिख सकता है लेकिन अगर सुविधाओं में सुधार नजर आया तो पर्यटक इसे स्वीकार कर लेंगे. अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इस अतिरिक्त पैसे का इस्तेमाल जमीन पर कितने असरदार तरीके से कर पाती है. क्योंकि, अभी जनवरी 2026 में बर्फबारी के दौरान ऐसे वीडियोज की सोशल मीडिया पर झड़ी लग गई थी जब टूरिस्ट दो-तीन दिनों तक जाम में फंसे रहे, और कई घंटे पैदल चलकर शिमला, मनाली जैसी जगहों पर पहुंचे. तब सवाल उठाए जा रहे थे कि इन पर्यटकों के लिए बेसिक फैसिलिटी भी सड़कों पर सरकार की तरफ से क्यों मुहैया नहीं करवाई गई? अब देखना ये है कि क्या बढ़ी फीस के बाद पर्यटकों को बढ़ी सुविधाएं भी मिल पाएंगी.

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