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दिल्ली में BJP सरकार का एक साल; पांच बड़े वादों का क्या हुआ? दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले अपने घोषणापत्र में BJP ने जो वादे किए थे, उनमें से इन पांच का बड़े जोर-शोर से प्रचार किया गया था

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रेखा गुप्ता ने पिछले साल 20 फरवरी को दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. यानी बतौर मुख्यमंत्री उनके कार्यकाल का पहला साल आज पूरा हो रहा है. 27 सालों के बाद दिल्ली प्रदेश की सत्ता में आने की कोशिश कर रही भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विधानसभा चुनाव के लिए जो घोषणापत्र जारी किया था, उसमें 16 प्रमुख वादे किए गए थे.

इस घोषणापत्र को BJP ने ‘विकसित दिल्ली संकल्प पत्र 2025’ का नाम दिया था. इसमें किए गए वादों में से कुछ प्रमुख वादों पर अब तक कुछ नहीं हुआ है. इनमें से ये पांच प्रमुख वादे ऐसे हैं जिन्हें पूरा करने की उम्मीद रेखा गुप्ता सरकार से दिल्ली की जनता लगा रही है.

1. महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये

2025 में जब दिल्ली विधानसभा चुनावों के दिन नजदीक आने लगे तो 2015 से दिल्ली की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी (AAP) ने महिला सम्मान योजना के लिए दिल्ली की महिलाओं का रजिस्ट्रेशन करना शुरू किया. इसके तहत आप ने महिलाओं को हर महीने 2,100 रुपये की आर्थिक सहायता देने का वादा किया था. ऐसे में दिल्ली की सत्ता से 27 वर्षों का वनवास झेल रही BJP ने ‘महिला समृद्धि योजना’ की घोषणा की. इसके तहत महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की आर्थिक मदद देने का वादा किया गया था.

चुनावों के दौरान यह सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा चर्चित वादा था. चुनावी रैलियों में उस समय BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे जेपी नड्डा ने तो यहां तक कह दिया था कि 8 मार्च 2025 को पहली किस्त खाते में आ जाएगी. लेकिन ऐसा नहीं हो सका. सरकार के कार्यकाल का एक वर्ष भी पूरा हो गया लेकिन दिल्ली की महिलाओं का इस रकम का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा.

इस योजना की स्थिति यह है कि 8 मार्च, 2025 को दिल्ली सरकार की कैबिनेट ने महिला समृद्धि योजना को मंजूरी दे दी थी. इसके लिए 5,100 करोड़ रुपये के बजट का भी प्रावधान किया गया. कहा गया कि इसके लाभार्थियों के रजिस्ट्रेशन के लिए एक पोर्टल तैयार किया जाएगा. अब जब सरकार को एक साल पूरा हो रहा है और सरकार से इस बारे में सवाल किए जा रहे हैं तो दिल्ली सरकार की तरफ से कहा गया है कि इसके लिए पोर्टल 23 फरवरी को खोल दिया जाएगा और उस दिन से लाभार्थी अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं.

हालांकि, इसमें भी अब चार दिन से कम का वक्त बचा है लेकिन अब भी इस योजना के लाभार्थियों की पात्रता की शर्तों की औपचारिक तौर पर घोषणा नहीं हो पाई है. सूत्रों के हवाले से जो खबरें प्रकाशित हो रही हैं, उनमें कहा जा रहा है कि 2.5 लाख रुपये से कम वार्षिक आय, परिवार में किसी सरकारी कर्मचारी या करदाता का नहीं होना और परिवार में कार नहीं होने जैसी शर्तें लाभार्थियों के लिए रखी जा सकती हैं.

2. यमुना की सफाई

साल भर बाद भी मोटे तौर पर यमुना की स्थिति जस की तस दिख रही है. दिल्ली को नोएडा से जोड़ने के लिए जहा-जहां यमुना पर सड़क, रेल या मेट्रो के पुल बने हैं, वहां से देखें तो यमुना में पानी के ऊपर जमा झाग पहले की तरह आज भी देखा जा सकता है. लेकिन दिल्ली सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों से बात करने पर वे इस दिशा में किए गए कार्यों की फेहरिस्त गिनाने लगते हैं. यह भी एक तथ्य है कि कागजों पर इस दिशा में बीते एक साल में कई निर्णय लिए गए हैं लेकिन ऐसा लग रहा है जमीनी स्तर पर अब भी इसका प्रभाव दिखने में वक्त लगेगा.

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से जब इस बारे में सवाल पूछा जाता है तो वे कहती हैं कि यमुना सफाई ‘लेगेसी प्रॉब्लम’ है और यह दशकों की उपेक्षा का नतीजा है और इसे तुरत-फुरत सुधारने के लिए उनके पास कोई जादुई छड़ी नहीं है. बीते एक साल में यमुना की सफाई के लिए दिल्ली सरकार ने सीवेज ट्रीटमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं.

तकरीबन 2,100 करोड़ रुपए की निवेश वाली परियोजनाओं की घोषणा की गई है. रेखा गुप्ता सरकार ने 2028 तक दिल्ली की सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता को 814 एमजीडी (मिलियन गैलन प्रतिदिन) से बढ़ाकर 1,500 एमजीडी करने का लक्ष्य रखा है. इसके अलावा सरकार ने दिल्ली के 20 प्रमुख नालों को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स से जोड़ने की योजना पर भी काम आगे बढ़ाया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जनवरी 2026 में यमुना सफाई के लिए स्पेशल टास्क फोर्स भी गठित किया है. BJP नेताओं और दिल्ली सरकार के मंत्रियों का कहना है कि इन कोशिशों का परिणाम प्रभावी तौर पर दिखने में अब भी एक-डेढ़ साल का वक्त लग सकता है.

3. अनाधिकृत कॉलोनियों का पूर्ण नियमितीकरण और मालिकाना हक 

BJP ने अपने घोषणापत्र में दिल्ली की तकरीबन 1,700 अनधिकृत कॉलोनियों को रेगुलराइज करके इनमें रहने वाले लोगों को पूरा मालिकाना हक देने का वादा किया था. एक अनुमान है कि इन कॉलोनियों में 40 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं. इन कॉलोनियों में BJP को वोट भी अच्छी संख्या में मिले थे. इससे लगा कि लोगों ने BJP के इस वादे पर भरोसा किया. BJP के संकल्प पत्र में साफ लिखा था, ‘पूर्ण मालिकाना हक, टास्क फोर्स गठन, कॉलोनी अपग्रेडेशन कमीशन, सड़क-नाले-पानी-बिजली सब कुछ.’

लेकिन BJP की रेखा गुप्ता सरकार के कार्यकाल का पहला साल पूरा होने के बावजूद न तो कोई टास्क फोर्स बनी, न ही कोई कमीशन गठित हुआ, कोई नोटिफिकेशन भी नहीं आया और मामला जस का तस बना हुआ है. कुछ कॉलोनियों में सर्वे जरूर हुए लेकिन मालिकाना हक का कागज अभी तक किसी को नहीं मिला. इस बारे में सवाल पूछे जाने पर सरकार की तरफ से कहा जा रहा है कि यह ऐसी समस्या नहीं है जिसका रातों-रात समाधान हो जाए और इसके समाधान के लिए ‘कानूनी प्रक्रिया’ चल रही है.

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