फूड लेबलिंग कंपनी लेबलब्लाइंड ने 227 ब्रांडों के 586 पैकेटबंद फूड प्रोडक्ट पर की गई रिसर्च में पाया है कि आधे से ज्यादा प्रोडक्ट की पैकेजिंग में किए गए दावे गलत हैं या गुमराह करने वाले हैं
आजकल फूड प्रोडक्ट के पैकेट सूचनाओं से लबालब होते हैं. इन पर बड़े-बड़े अक्षरों में सामग्री, न्यूट्रिशन जानकारी और मार्केटिंग के आकर्षक शब्द छपे मिलते हैं. फूड कंपनियां अपने प्रोडक्ट को ‘सबसे बेहतर’ या ‘हेल्थ के लिए फायदेमंद’ साबित करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाती हैं.
हालांकि, AI-आधारित डिजिटल फूड लेबलिंग कंपनी लेबलब्लाइंड ( LabelBlind) ने अपनी 2025–26 रिसर्च में इस इंडस्ट्री की सच्चाई उजागर कर दी है. कंपनी ने 227 ब्रांडों के 586 पैकेटबंद उत्पादों (18 कैटेगरी में) पर 5,058 दावों का विश्लेषण किया. रिजल्ट चौंकाने वाला था.
कुल 33.6 फीसद दावे या तो पूरी तरह नियम और मापदंडों को पूरी करने वाले नहीं थे या बिना पर्याप्त सबूत के थे. यानी हर तीन में से एक दावा नियमों पर खरा नहीं उतरता या भ्रामक हो सकता है. स्वास्थ्य संबंधी दावे तो और भी ज्यादा समस्या वाले पाए गए.
कई मामलों में कंपनियां भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों, भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (ASCI) और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के दिशानिर्देशों का पालन नहीं कर रही हैं.
कंपनी की रिसर्च में कुल 5,058 दावों का विश्लेषण किया गया. दावों को देखकर ही समझा जा सकता है कि पैकेजिंग पर ये कंपनियां जरूरत से ज्यादा दावे कर रही हैं. हर प्रोडक्ट पर औसतन आठ से नौ दावे थे, जबकि प्रोटीन पाउडर जैसे प्रोडक्ट में तो न्यूट्रिशन और स्वास्थ्य को लेकर 17 से ज्यादा दावे किए गए थे.








