ग्लोबल टेक पावर हाउस होने के नाते भारत में यह सवाल जोरों से उठ रहा है कि क्या हम सचमुच डिजिटल इकोनॉमी और AI मॉडल में आत्मनिर्भर हो सकेंगे. अभी देश में उपलब्ध AI का पूरा ढांचा विदेशी संदर्भों और सुविधाओं पर टिका हुआ है. यह सवाल दिल्ली में चल रही ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट’ की हर चर्चा में उठ रहा है और इसका जवाब मिलता है भारत के अपने सॉवरेन AI (Sovereign AI) में.
दुनिया के सबसे लोकप्रिय AI प्लेटफॉर्म विदेशी लॉजिक और डेटा पर तैयार हुए हैं और इनका नियंत्रण भी विदेशी जमीन से होता है. ये सभी मुख्य रूप से अंग्रेजी केंद्रित हैं. सॉवरेन AI मिशन को समझने के लिए इंडिया AI मिशन के अगुआ अभिषेक सिंह की बात गौर करने वाली है.
समिट के दौरान उन्होंने कहा, “परस्पर निर्भरता के वैश्विक दौर में सॉवरेन होने का मतलब है कि क्या करना है, कैसे करना है और किसके साथ करना है- इस पर आपका पूरा नियंत्रण हो. इसका मतलब यह नहीं है कि सब कुछ खुद ही करना है.”
सिंह कहते हैं, “लोगों का जीवन बेहतर करने के लिए हमें अपना AGI (आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस) चाहिए. अपनी आवाज का इस्तेमाल करके अगर लोग AI का उपयोग कर सकें और अपनी आय बढ़ा सकें, तो उसे ही हम सॉवरेन AI कहेंगे.”
डिजिटल सॉवरेनटी हासिल करना भारत का एक महत्वाकांक्षी और जटिल लक्ष्य है. अभी भारत मोटे तौर पर AI उपभोक्ता है और वह भी अंग्रेजी भाषा का. भारतीय भाषाओं में लोगों की बात समझने वाले AI का विकास ‘भारतजेन’ (BharatGen) कर रहा है. भारतजेन घरेलू AI मॉडल हमारी संस्कृति के अनुरूप, इंडिया-सेंट्रिक LLM के जरिए बना रहा है. सॉवरेन इंफ्रास्ट्रक्चर का मतलब सिर्फ डेटा भारत में रखे जाने से नहीं है. अगर AI का पूरा तंत्र, हार्डवेयर और होस्टिंग बाहर होगी तो उसे थर्ड पार्टी कभी भी स्विच ऑफ कर सकेगी, इसलिए यह भी देश में ही होना चाहिए.








