उद्योग और व्यापार

प्रधान संपादक की कलम से इस पूरे बजट का विचार साफ है: कम में ज्यादा हासिल करना. हर रुपए से ज्यादा उत्पादकता निकालना. लेकिन यह मितव्ययिता सिर्फ बचत के लिए नहीं है. हर कदम नपा-तुला है ताकि आगे नए रास्ते खुल सकें

 अरुण पुरी बजट बनाना कोई आसान काम नहीं होता. इसमें बहुत सारे गतिशील ‌‌हिस्से और बदलता हुआ डेटा होता है. भारत जैसे देश में इसका

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सबसे बड़ी ट्रेड डील जटिलताएं बेशक शायद बारीकियों में हों लेकिन भारत-अमेरिका करार दोनों देशों के संबंधों को फिर से पटरी पर ले आए और प्रमुख श्रम-प्रधान क्षेत्रों में भारत की प्रतिस्पर्धा की क्षमता बहाल होगी

  छह माह तक खींचतान, कड़वाहट, और आपसी टकराव के बाद 2 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर

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चुनाव के तौर-तरीकों को AI बना सकता है बेहतर, लेकिन इसके खतरे भी कम नहीं! चुनावों की प्रक्रिया को AI की मदद से बेहतर बनाने के लिए ‘AI और चुनाव’ विषय पर 20 फरवरी को नई दिल्ली में एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन होने जा रहा है जिसमें इससे जुड़े खतरों पर भी बात होगी

  भारत में आयोजित AI ​समिट की चर्चा अभी हर तरफ चल रही है. इसी AI समिट के बीच भारत निर्वाचन आयोग के तहत काम

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EU से ट्रेड डील कैसे यूरोप को भारतीय गहनों के लिए एक बड़ा बाजार बनाने जा रही? इंडियन जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) का अनुमान है कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) के कारण तीन वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 10 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है

  भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने न केवल भारत के रत्न और आभूषण से जुड़े कारोबारियों के लिए दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा

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इंडिया टुडे आर्काइव : AI बनाएगा सेना को ताकतवर, लेकिन नए जोखिम भी लाएगा!

इंडिया टुडे आर्काइव : AI बनाएगा सेना को ताकतवर, लेकिन नए जोखिम भी लाएगा! जनरल एम.एम. नरवणे (रिटायर्ड) का यह आलेख इंडिया टुडे मैगजीन के

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आखिर भारत के लिए अपना देसी AI क्यों जरूरी है? दुनिया के सबसे लोकप्रिय AI प्लेटफॉर्म विदेशी लॉजिक और डेटा पर तैयार हुए हैं और इनका नियंत्रण भी विदेशी जमीन से होता है

ग्लोबल टेक पावर हाउस होने के नाते भारत में यह सवाल जोरों से उठ रहा है कि क्या हम सचमुच डिजिटल इकोनॉमी और AI मॉडल

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कल्याण नहीं, अधिकार: भारत को अब एक समान राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन दर अपनानी ही होगी भारत में आज दिव्यांग आबादी 4.5 से 5 करोड़ के बीच है और इसमें से महज 40-45 फीसदी पात्र व्यक्तियों को ही दिव्यांग पेंशन मिलती है

भारत एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां उसके कल्याणकारी राज्य की असली परीक्षा हो रही है. आयुष्मान भारत, जैम (जनधन, आधार और मोबाइल), डीबीटी,

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ग्रोथ की लहरों पर सवार टैक्स कटौती, जीएसटी में राहत और ब्याज दरें घटने से खपत बढ़ी और ग्रोथ ऊपर चढ़ी. ऐसे में अर्थव्यवस्था को लेकर जन भावना उम्मीदों से भरी. महंगाई दर भी कम है यानी गोल्डीलॉक मोमेंट (ग्रोथ ज्यादा, महंगाई कम) बना हुआ है. लेकिन रोजगार के मोर्चे पर अब भी काले बादल मंडरा रहे.

  नए साल के आगाज के साथ ही भारत वृद्धि या ग्रोथ की राह पर मजबूती से आगे बढ़ता लग रहा है. 2025 में कई

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बेहतर भारत के लिए बढ़ती चाह भारतीयों का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार से लड़ाई और इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर तो तरक्की हुई है लेकिन एआइ, नए लेबर कानून और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर राय बंटी हुई

  जनवरी 2026 का इंडिया टुडे देश का मिज़ाज सर्वे ऐसे भारत की तस्वीर पेश करता है, जो बदलाव को आत्मविश्वास, बेचैनी और सशर्त भरोसे

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भरोसा तो है लेकिन बेचैनी भी कायम ज्यादातर लोगों की राय में यह सही है लेकिन इसे पूर्वाग्रह से ग्रस्त मानने वालों की संख्या भी कम नहीं

भारतीय लोकतंत्र ऐसा विषय है जिस पर लगातार बहस होती है. आज भारत में लोकतंत्र कितना मजबूत है? क्या चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होते हैं?

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