
भरोसा तो है लेकिन बेचैनी भी कायम ज्यादातर लोगों की राय में यह सही है लेकिन इसे पूर्वाग्रह से ग्रस्त मानने वालों की संख्या भी कम नहीं
भारतीय लोकतंत्र ऐसा विषय है जिस पर लगातार बहस होती है. आज भारत में लोकतंत्र कितना मजबूत है? क्या चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होते हैं?









